बसपा नेता जहीर मलिक के खिलाफ आईटी एक्ट का मुकदमा, सियासी गलियारे में खलबली

April 8, 2016 3:23 pm0 commentsViews: 361
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नजीर मलिक

जहीर मलिक के साथ उनका वह मैसेज जिसमें रहीमुल्लाह की मौत की बात लिखने के साथ नीचे उनके घायल होने और अस्पताल में दाखि होने की बात लिखा है

जहीर मलिक के साथ उनका वह मैसेज जिसमें रहीमुल्लाह की मौत की बात लिखने के साथ नीचे उनके घायल होने और अस्पताल में दाखिल होने की बात भी लिखा है

सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज विधानसभा सीट से बसपा उम्मीदवार सैयदा मलिक के पति जहीर मलिक के खिलाफ पथरा थाने मे आईटी एक्ट के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। उन पर अफवाह फैलाने और माहौल बिगाड़ने का आरोप है। इस प्रकरण से सियासी गलियारे में खलबली मच गई है।

जहीर मलिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज हाने की खबर से जिले का सियासी माहौल गर्मा गया है। कई बसपा नेता इसे सामाजवादी सरकार के एक और उत्पीड़क कार्रवाई के तौर पर देख रहे हैं। जबकि पुलिस इसे जरूरी कार्रवाई मान रही है।

क्या है जहीर मलिक पर आरोप?

पुलिस के मुताबिक बसपा नेता जहीर मलिक ने तीन अप्रैल को वाट्सए पर पथरा थाने के बिलवट गांव में हुई एक हिंसक घटना की जानकारी शेयर की थी। जिसमें रहमुल्लाह की मौत और पुलिस की कार्रवाई न होने की बात कही थी।

पुलिस का कहना है कि उसने घटना का मुकदमा लिखा और गिरफ्तारी करने व मौके पर फोर्स तैनात करने की कार्रवाई भी की। लिहाजा उनका मैसेज साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने वाली अफवाह की श्रेणी में आता है।

इस प्रकरण में कल शाम पथरा थाने में जहीर मलिक के खिलाफ आईपीसी की धारा 505 2 व धारा 66 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस मामले की विवेचना में लग गई है।

कमजोर है पुलिस की दलील

हालांकि पुलिस ने जहीर मलिक के खिलाफ मुकदमा जरूर दर्ज किया है लेकिन तथ्यों के आधार पर उसकी दलील कमजोर दिख रही है।
अगर आप जहीर मलिक के मैसेज को पढ़ेंगे तो देखेंगे कि उसमें पहली लाइन में रहीमुल्लाह की मौत की बात तो लिखी है लेकिन नीचे कि लाइन में उसी मैसेज में रहीमुल्लाह को अस्पताल में दाखिला होना और स्थिति गंभीर होना भी बताया गया हैं।

दरअसल ऐसे अपराधों में इंटेंशन महत्वपूर्ण होता है। मैसेज में रहीमुल्लाह को घायल हालत में अस्पताल मे होने की बात लिखने से यह भी प्रतीत होता है कि पहली लाइन में मौत की घटना का लिखा जाना पेन स्लिप भी हो सकता है।

जहां तक कानूनी मसला है पुलिस के पास मुकदमा दर्ज करने का आधार तो है ही। इस बारे में जहींर मलिक से भी सम्पर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। फिलहाल यह मामला सियासी गलियारे में चर्चा का बायस बना हुआ है। बसपाई इसीे सपा सरकार की तानाशाही करार दे रहे हैं।

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