एक और कालेज संचालक पर जबरन धर्म परिवर्तन कराने के प्रयास का आरोप
प्रबंधक शब्बीर अहमद पर लगाये आरोप की तर्ज पर ही लगाया गया है ताजा आरोप
शिकायतपत्र में धर्म परिवर्तन के प्रयास की घटना के बारे में कोई दिन समय दर्ज नहीं
नजीर मलिक
सिद्धार्थनगर। जिले में अभी अल फारूक इंटर कलेज के प्रबंधक शब्बीर अहमद पर धर्मानांरण कराने का आरोप ठंडा भी नहीं पड़ा था की एक और स्कूल के संचालक पर धर्म परिवर्तन कराने के लिए दबाव डालने का मामला पुलिस के समक्ष आ गया। इससे धर्मांतरण का प्रकरण और भी चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि पुलिस ने इस प्रकार की शिकायत से इंकार किया है। लोग बाग अब मजाक में ही सही, लेकिन यहां तक चर्चा करने लगे हैं कि जिले में अगला निशाना किस पर साधा जायेगा।
इस बार सदर थाने में दिये शिकायतपत्र में जिला मुख्यालय के विजयनगर निवासी बीरेन्द्र ने आरोप लगाया है कि सदर थाना क्षेत्र के ग्राम महुरिया निवासी मनौव्वर हुसैन ने अपने स्कूल हुदा गर्ल्स कालेज में उसे यानी बीरेन्द्र को चपरासी पद पर नियुक्ति का लालच दिया। उसके इंकार करने पर मुनव्वर हुसैन ने उन्हें, मारने पीटने सहित गाली गलौज व जान माल की धमकी देना शुरू कर दिया तथा खतना कराने का भी असफल दबाव डाला। यही नहीं धर्म बदलने के बाद उसे दस लाख रुपया देने और कतर ले जाने की बात भी मुनव्वर ने कही। मुनव्वर काफी दबंग व्यक्ति है।
प्रार्थनापत्र में कार्रवाई की मांग करते हुए बीरेन्द्र ने यह भी लिखा है कि मुनव्वर हुसैन मूल रूप से नेपाल का रहने वाला है। वह हवाला कारोबार के साथ बार्डर क्षेत्र में धर्मांन्तरण कराने का काम भी करता है। उसके खाड़ी देश कतर में भी लिंक हैं। बीरेन्द्र ने मीडिया को बताया कि ध्र्मांतरण के मामले में तेजी से हा रही कार्रवाइयों से लगा कि उसे भी पुलिस के पास जाना चाहिए।
यहां यह उल्लेखनीय है कि बीरेन्द्र ने अपनी शिकायत में पूरे घटना के बारे में किसी भी तारीख या समय का उल्लेख नहीं किया है। बस सारी बातें सरसरी तौर पर लिखा है। फिलहाल इस बारे में सदर थाने के कोतवाल दुर्गा प्रसाद ने बताया कि इस आशय का कोई भी प्रार्थनापत्र अभी तक उनके संज्ञान में नहीं आया है। इस संदर्भ में मुनव्वर हुसैन से भी सम्पर्क नहीं हो सका है। बता दें कि इसी प्रकार के आरोप में इटवा थाने में अल फारूक इंटर कालेज के प्रबंधक शब्बीर अहमद को गत बुधवार को जेल भेजा जा चुका है। जिसकी क्षेत्र में व्यापक चर्चा है। प्रबंधक शब्बीर के मामले में भी चपरासी के नौकरी का हवाला दिया गया था। ताजा मामले में भी ठीक ऐसा ही आरोप लगाया गया है।





