भाजपा नेता दिलीप चौरसिया रहस्यमय ढंग से गायब, लूटपाट या हत्या जैसी अनहोनी की आशंका

February 26, 2021 1:24 pm0 commentsViews: 894
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‘क्या मंदिर निमार्ण निधि’ की रकम को लेकर उनके साथ लूटपाट तो नहीं की गई अथवा मर्डर तो नहीं हुआ?

नजीर मलिक

सिद्धार्थनगर। भाजपा नेता व संगठन के मिठवल मंडल उपाध्यक्ष दिलीप चौरसियाकी गुमशुदगी का रहस्य तीसरे दिन भी अनसुलझा रहा। इस बारे में पुलिस जांच एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई है। बांसी तहसील में अब यह आशंका जोर पकड़ती जा रही है कि कहीं लूट पाट के दौरान उनकी हत्या तो नहीं हो गई? उल्लेखनीय है कि दिलीप चौरसिया बुधवार को राम मंदिर निर्माण के लिए मिले दान की रकम पार्टी कोष में जमा करने के लिए निकले थे। तब से उनका पता नहीं है।

क्या है असली मामला

बुघवार को दिन में अपने एक परिचित की बाइक मांग कर दिलीप चौरसिया मिठवल के अपने गांव नौडिहवा से तिलौली के लिए निकले थे। उनके पास राम मंदिर निर्माण के लिए मिले दान के लगभग 44 हजार रुपये थे। जिसे पार्टी के नेता ओम प्रकाश चौधरी के पास जमा करने के लिए तिलौली जा रहे थे। लेकिन चार बजे के आसपास उनका मोबाइल बंद हो गया। इसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल पा रहा है। मोबाइल बंद होने से परेशान उनके परिवार के लोग बेचैन हुए और खोजबीन शुरू हुई।

लावारिस मिली मोटर साइकिल

बुधवार को ही रात साढ़े 11 बजे के आसपास उनकी मोटर साइकिल बेलगड़ी के पास लावारिस दशा में गश्ती पुलिस को मिली मिली। जिसे वहीं पास में बन रहे टोल प्लाजा के पास रख दिया गया । उस समय वहां कुछ और सामान न मिला। गुरुवार की सुबह अचानक उसी स्थान के आस पास उनका मोबाइल फोन, चप्पल और बेल्ट आदि मिले।  यहां यह भी बताना जरूरी है कि उनमें से बरामद बेल्ट कई जगह से टूटी हुई थी।इसके बाद से किसी अनहोनी की आशंका को ध्यान में रख कर पुलिस सक्रिय हुई। अब सवाल है कि आखिर दिलीप के साथ क्या हुआ या होने की आशंका है।

बता दें कि दिलीप चौरसिया बांसी तहसील के मिठवल ब्लाक के ग्राम नौडिहवा के रहने वाले थे। 35 साल के दिलीप भाजपा के समर्पित वर्कर और मिठवल मंडल के उपाध्यक्ष थे। वह गरीब जरूर थे परन्तु ईमानदार थे। इसीलिए उन्हें मंदिर निर्माण निधि को सहेजने की जिम्मेदारी दी गई थी। उसी रकम को पार्टी के कोष में जमा करने वे भाजपा नेता ओम प्रकाश चौधरी के पास तिलौली जा रहे थे। लेकिन उनकी यह यात्रा एक  ट्रवेल मिस्ट्री में बदल गई।

बाइक मिली मगर अन्य सामान दूसरे दिन क्यों मिले

बहरहाल अगर दिलीप की बाईक मिलने वाले स्थल का बारीकी से विश्लेषण किया जाये तो बहुत महत्वपूर्ण सवाल उठते हैं। पहली बात कि जब रात में उनकी बाइक मिली तो वहां मोबाइल, चप्पल व बेल्ट आदि क्यों नहीं मिले। कहीं ऐसा तो नहीं कि कुछ लोग उन्हें बुला कर ले गये हों और घटना कारित करने के बाद पुलिस को गुमराह करने के उद्देश्य से उनकी मोबाइल, चप्पल  व बेल्ट वहां बाद में डाल गये हों। सबूत प्लांट करने की इस तरह की घटनाएं अपराध जगत में अक्सर दोहराई जाती रही हैं।

क्या है टूटी हुई बेल्ट का राज

घटना स्थल से मुड़ी तुड़ी और टूटी हुई बेल्ट बरामद होने से इस बात की आशंका होती है कि सम्भवतः आतताईयों ने उनकी पैंट की भीतरी जेब से रुपये छीनने की कोशिश की हो और इसी छीना झपटी में उनकी बेल्ट टूटी हो। उसके बाद आतताइयों ने रुपया छीनने के बाद पहिचान खुल जाने के डर उनकी हत्या कर दी हो। लूट के ऐसे मालों में लुटेरे आम तौर पर भारी प्रतिरोध या पिचाने जाने के डर से ही हत्या करते हैं। लूट की समान्य घटनाओं में बदमाश इससे बचते हैं। यह थ्यौरी पुलिस वाले भली भांति समझते हैं।

अहित करने वाला हो सकता है जाना पहिचाना

इस घटना के अब तक उपलब्ध परिस्थितिजन्य सबूत और हालात इस आशंका को जन्म देते हैं कि भाजपा नेता की रुपयों के लिए हत्या की जा सकती है तथा उसमें कोई ऐसा चेहरा शामिल हो सकता है, जो जाना पहिचाना हो। यदि उनके साथ केवल लूटपाट हुई होती तो अब तक दलीप जिस भी हालात में होते, सामने आ गये होते। इससे लगता है कि उनके साथ अवश्य अनहोनी हुई है।इसलिए पुलिस को इस घटना को अति गंभीर मान कर गहराई से जांच करनी होगी। तभी पूरी घटना की असलियत सामने आ सकती है।

गोविंद माधव ने ली घटना की जानकारी

एक अन्य समाचार के अनुसार भाजपा के जिला अध्यक्ष गोविंद माधव ने घटना की सूचना पाकर घटना  पर पहुंच कर सारी जानकारी लेने के बाद पुलिस अधीक्षक राम अभिलाष त्रिपाठी से मिल कर इस घटना पर विस्तृत विचार विमर्श किया। उन्होंने एसपी से घटना का शीघ्र खुलासा करने का आग्रह  करते हुए कहा कि इससे पार्टी जन दुखी हैं।  इसे हल्के में नहीं लेना होगा।। दौरे में उनके साथ भाजपा नेता शिवनाथ चौधरी, रमेशधर त्रिपाठी, रवीन्द्र चौरसिया नीरज मणि चीरेन्द्र राव आदि साथ रहे।

 

 

 

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