सिद्धार्थनगर की मिट्टी से जुड़कर शोध का अनूठा उदाहरण बनीं डॉ. सीमा मिश्रा

August 13, 2025 6:13 PM0 commentsViews: 3409
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अजीत सिंह 

सिद्धार्थनगर। जौनपुर जनपद मूल की और अब साहित्य संगम सिद्धार्थनगर की अध्यक्ष डॉ. सीमा मिश्रा ने यह साबित कर दिया कि लगन, संवेदन शीलता और अपनापन किसी भौगोलिक सीमा का मोहताज नहीं होता। मायका जौनपुर होने के बावजूद उन्होंने अपने शोध कार्य के लिए ससुराल वाला जिला सिद्धार्थनगर चुना और इस पर गहन अध्ययन कर एक मिसाल कायम की।

वर्ष 2012 में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर से भूगोल विषय में पीएचडी उपाधि प्राप्त करते समय उनका शोध विषय था – “जनसंख्या प्रतिरूप, विकास परिदृश्य एवं पर्यावरण विघटन : सिद्धार्थनगर जनपद का एक भौगोलिक विवेचन”। इस अध्ययन में उन्होंने जिले के जनसंख्या ढांचे, विकास की चुनौतियों और पर्यावरणीय क्षरण के पहलुओं पर विस्तृत और तथ्यात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया।

यह कार्य न केवल अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सिद्धार्थनगर के विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी एक उपयोगी दस्तावेज है। गौर करने वाली बात यह है कि यह काम सिद्धार्थनगर के लोगों को करना चाहिए था, लेकिन डॉ. मिश्रा ने बाहरी होते हुए भी इसे अपने मन और कर्म से अपनाया और करके दिखाया। शोध निर्देशक डॉ. देवी प्रसाद उपाध्याय के मार्गदर्शन में तैयार हुआ यह शोध, स्थानीय मुद्दों को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में समझने की उनकी गहरी दृष्टि को दर्शाता है।

डॉ. सीमा मिश्रा का यह प्रयास सिद्धार्थनगर और जौनपुर के बीच ज्ञान और संवेदनशीलता का सेतु बन गया है। उनकी यह उपलब्धि आने वाले शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणा है कि अगर मन में जज्बा हो, तो अपनेपन और जिम्मेदारी की सीमा केवल एक पते तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे समाज को अपना मानकर काम किया जा सकता है।

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