डुमरियागंज ब्लाक प्रमुख की लड़ाई में सपा को थका कर मैदान मारने की रणनीति

August 28, 2017 6:42 pm0 commentsViews: 1485
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नज़ीर मालिक 

सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज ब्लाक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा सथागित करने को एक हफता हो गया है। इसके बावजूद अगली बैठक होने की तिथि का एलान नहीं हो पाया है। प्रशासन इस बारे में सैलाब की समस्या को अपना तर्क बना रहा है। जबकि जनता के एक वर्ग का मानना है कि दरअसल यह प्रमुख पक्षा को थका कर हराने की रणनीति है, जिसे सत्ता पक्ष के दबाव में अमल में लाया जा रहा है।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
डुमरियागंज के सियासी गलियारों में चल रही चर्चा के मुताबिक इस तहसील के डुमरियागंज ब्लाक में बाढ़ की कोई समस्या नहीं है, जिसकी ओट लेकर अविश्वास की बैठक टाली जाता, मगर प्रशासन ने 22 अगस्त को अैठक शुरू होने से ठीक एक घंटे पहले उसे स्थगित कर दिया तथा जल्द ही बैठक की तिथि निर्धारित करने का एलान किया। लेकिन सात दिन गुजर जाने के बाद भी अभी बैठक की तिथि घोषित नहीं हुई। इसके निहतार्थ क्या हैं, अब इसका कयास लगाया जा रहा है।

75 बीडीसी गुप्त स्थान पर हैं
कयासबाजियों के मुताबिक डुमरियागंज में कुल 141 बीडीसी मेंबर हैं। इनमें से लगभग 75 सदस्य अपने घरों से गायब होकर कहीं गुप्त स्थान पर रह हैं। बताया जाता है कि वहां के ब्लाक प्रमुख मिठ्ठू यादव के समर्थक हैं। मिठ्ठू यादव सपा नेता चिनकू यादव के पिता हैं। बताते हैं कि सभी 75 बीडीसी सत्ता पक्ष के दबाव के डर से गायब हैं और किसी गुप्त स्थान पर रह रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा खेमे का मानना है कि उन्हें सपा नेता चिनकू यादव लालच देकर कहीं छिपाये हुए हैं।

बहरहाल दोनों ही स्थितियों में भाजपा का ही घाटा है। अविश्वास प्रस्ताव की बैठक में यदि ये उपस्थित नहीं हुए तो कोरम के अभाव में चर्चा रद हो जायेगी और मिठ्ठू यादव स्वतः ब्लाक प्रतुख मान लिये जायेंगे। 22 अगस्त की बैठक के दिन भी कुल 30 बीडीसी ही ब्लाक के इर्द गिर्द देखे गये थे। ऐसे में बैठक को स्थगित करने का आदेश दिया गया।

क्या है रणनीति
अब रणनीति यह है कि सपा को इस प्रकरण में थका कर मारा जाये। जानकारों के अनुसार सभी 75 बीडीसी मेंबरों को लंबे समय तक परिवार से अलग रख पाना संभव न होगा। जल्द ही उनमें घर के लिए अकुलाहट होगी। वो लोग घर लौटेंगे। उसके बाद भाजपा के पक्ष में उनकी घेरेबंदी की जायेगी और अविश्वास की तिथि घाषित कर दी जायेगी। इस प्रकार भाजपा अविश्वास प्रस्ताव को पास कराने में कामयाब हो जायेगी।

इस बारे में भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रशासन उनके पक्ष में बिलकुल नहीं है। वह तारीख तय करें। हमने प्रस्ताव पास कराने की तैयारी कर रखी है। जबकि सपा नेता चिनकू यादव समेत तमाम सपाई खुल कर आरोप लगा रहे हैं कि प्रशासन और पुलिस के लोग बीडीसी मेंबरों को ही नहीं स्वयं सपाइयों को भी धमका रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद जीत सपा की ही होगी। फिलहाल अविश्वास की तिथि घोषित न करने से प्रशासन पर अंगुलियां उठनी शुरू हो गई हैं। रही हार जीत की बात, तो यह अभी भविष्य के गर्भ में है।

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