ब्राह्मण व कुर्मी मतों को लेकर सपा, भाजपा और आसपा में जबरदस्त घींगामुश्ती

May 8, 2024 1:22 PM0 commentsViews: 975
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दोनों विशाल वोट बैंक पर निर्भर, मगर सपा के कुशल तिवारी, भाजपा के जगम्बिका पाल और आसपा के अमर सिंह के अपने-अपने दावे

 

 नजीर मलिक

सिद्धार्थनगर। चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। डुमरियागंज सीट के तीनों प्रमुख सियासी सेनापति अपने अपने योद्धाओं को लेकर यलगार के लिए तैयार हैं। उनके आक्रमण का पहला निशाना जिले का ब्राह्मण और कुर्मी वोट बैंक हैं। जिन पर भाजपा का एकाधिकार रहा है। मगर अब हालात कुछ ऐसे बने हैं कि सपा के ब्राह्मण प्रत्याशी कुशल तिवारी और आजाद समाज पार्टी के चौधरी अमर सिंह भाजपा के इन्हीं दोनों परम्परागत वोट बैंकों की किलेबंदी को ध्वस्त करने में लग गये हैं जबकि भाजपा प्रत्याशी जगदम्बिका पाल अपने इस किले को बचाने के लिए लगातार प्रत्याक्रमण कर रहे हैं।

2.20 लाख ब्राह्मण मतदाता

गौर तलब है आरक्षण की घोषणा के बाद से ही ब्राह्मण समाज कांग्रेस से कट कर भाजपा की तरफ खिसकने लगा तथा मोदी राज में तो वह पूरी तरह भाजपा के खेमे में आ गया। इसी तरह चौघरी चरण सिंह व मुलायम सिंह यादव की मृत्यु के बाद किसान कमेरा कहा जाने वाला कुर्मी समाज भी घीरे धीरे भाजपा की ओर सिमटता चला गया। इस प्रकार यह दोनों समाज भाजपा के तगड़े वोट बैंक बन गये। डुमरियागंज सीट पर ब्राह्मण वोट 11 प्रतिशत अर्थात 2.20 लाख तथा कुर्मी वोट 1.20 लाख है। यह तो रहा इन दो वोट बैंकों का इतिहास जो भाजपा की जीत का कारण बनते रहे हैं, मगर इस बार हालात बदले हुए नजर आते हैं।

दो बार समाजवादी ब्राहमण जीते

भाजपा के सामने इस बार बेहतर रणनीति का प्रदर्शन करते हुए समाजवादी पार्टी ने ब्राह्मण समाज के अत्यंत प्रतिष्ठित परिवार से पंडित हरिशंकर तिवारी के बड़े बेटे कुशल तिवारी को मैदान में उतारा है। कुशल तिवारी के आने के बाद से यहां भाजपा के प्रति झुकाव रखने वाले ब्राह्मणों में कुशल तिवारी के प्रति उत्साह देखते ही बनता है। ब्राह्मण जानते हैं कि वर्ष 1989 व 96 के चुनाव में सपाई वोट बैंक के साथ खड़े रह कर अपने सजातीय प्रत्याशी को जिता चुका है। इस बार वह यही अंकांक्षा लिए दिखता है। इस खतरे को देखते हुए भाजपा प्रत्याशी जगदम्बिका पाल ने सच्चिदा पांडेय, अशोक तिवारी आदि ब्राह्मण नेताओं को दूसरे दलों से तोड़ का भाजपा में शामिल कराते हुए अपने सवर्ण किले को अभेद्य बनाने में जुटे हुए हैं। मगर  अपने 2.20 लाख के विशाल वोट बैंक को बचाने में पाल कितने कामयाब होंगे, भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा।

प्रत्याक्रमण में जुटे पाल

ब्राह्मण मतों की तरह कुर्मी समाज भी इस बार अपने सजातीय प्रत्याशी पूर्व विधायक अमर सिंह को पाकर उत्साह में है। आजादी के बाद से पहली बार इस समाज का कोई नेता संसद का चुनाव लड़ रहा है। अमर सिंह विधानसभा चुनाव में अपनी ताकत का एहसास कराते हुए अब कुर्मी समाज के नेता के रूप में स्थापित हो चुके हैं। उनकी पैठ मुसलमानों में भी है। चन्द्रशेखर आजाद की असपा से चुनाव लड़ कर भी वह बसपा के एक बड़े धडें का समर्थन पा चुके हैं। वह भी इस चुनाव में त्रिकोण के एक कोण हैं। फिलहाल कुर्मी समाज अमर सिंह के साथ है मगर भाजपा प्रत्याशी पाल इनको अपने पाले में रखने के लिए क्या रणनति अपना रहे हैं यह पता नहीं है। लकिन जानकार समझते हैं कि पाल किसी भी हवा का रुख मोड़ने में राजनतिक दृष्टि से बिलकुल सक्षम हैं।

मझे राजनीतिज्ञ हैं पाल

इतने विपरीत हालात के बावजूद यह कहना पड़ेगा कि सांसद पाल एक कुशल राजनतिज्ञ हैं और चुनाव के शातिर खिलाड़ी भी हैं। वह चुनावी शतरंज की विसात पर घोड़े की ढाई खाने की चाल चलने में महारत हासिल रखते हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि आगे का चुनाव बेहद दिलचस्प होगा। यही नहीं ब्राह्मण-कुर्मी रूपी भाजपाई किले पर कुशल तिवारी व अमर सिंह का अलग अलग अक्रमण और बदले में जगदम्बिका पाल के जवाबी आक्रमण को देखना चुनावी जंग का बेहतरीन क्षण साबित होगा। फिलहाल पढ़ते रहिए कपिलवस्तु पोस्ट।

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