पूर्व जिला पंचायत अघ्यक्ष सईद भ्रमर को चाहिए एक अदद बराबर का उम्मीदवार

September 29, 2015 8:05 AM0 commentsViews: 601
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नजीर मलिक

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क्षेत्र संख्या 46 से चुनाव लड़ रहे जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष मुहम्मद सईद भ्रमर के सामने उनकी कद काठी का कोई उम्मीदवार नहीं है। इसलिए यहां का चुनाव आकर्षण से दूर है। रोचक चुनाव के लिए एक सशक्त उम्मीदवार जरूरी है, जो फिलहाल नजर नहीं आ रहा है।

इस क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे मुहम्मद सईद भ्रमर समाजवादी पार्टी के सबसे कदृदावर नेताओं में गिने जाते है। वह इस इलाके से विधायक रहने के अलावा दो बार जिला पंचायत के अध्यक्ष भी रह चुके है। इलाके में उनकी साख और जनाधार असंदिध है।

जहां तक उनके मुकाबले में उतरे प्रत्याशियों का सवाल है, उनका कद भ्रमर के मुकाबले बहुत कम है।उनके सबसे सशक्त प्रतिद्धंदी मधुबनी ग्राम पंचायत के प्रधान अमजद अली और लाल साहब हैं।

यकीनन मधुबनी ग्राम पंचायत की आबादी बड़ी है, लेकिन सईद भ्रमर का यह पुराना गढ़ रहा है।यही नहीं मुधबनी के आस पास के गांवों में 1984 से ही उन्हें बहुमत के वोट मिलते रहे हैं। इसी क्षेत्र में सईद भ्रमर का पुश्तैनी गांव भी है। हालांकि वह उनके क्षेत्र में शामिल नहीं है, फिर भी इलाकाई होने का लाभ भी उनको मिलना तय है।

जहां तक लाल साहब का सवाल है वह सामाजिक तो जरूर हैं, लेकिन राजनीति में नहीं होने के कारण जनता के सवालों को लेकर उनका संधर्ष का इतिहास कभी नहीं रहा है। ठेके पटृटे के काम से जुड़े होने के कारण उनका एक समर्थक वर्ग जरूर है, लेकिन वह निर्णायक नहीं है।

इसके अलावा अतीकुर्रहमान और अब्दुल लतीफ भी यहां से उम्मीदवार हैं। लेकिन उनकी कोई सियासी पृष्ठिभूमि नहीं है। यह दोनों चुनाव में कितना वोट पा सकते है, सिर्फ यही देखना दिलचस्प होगा।

दरअसल सईद भ्रमर का राजनीतिक कद बहुत बड़ा है। उनका राजनीतिक जीवन और संघर्षों का इतिहास बहुत लंबा है। इसलिए माना जा रहा है कि इस चुनाव में उनकी स्थिति बहुत मजबूत है। क्षेत्र के अमीरुल्लाह का कहना है कि अगर उनकी बराबरी का कोई उम्मीदवार होता तो कुछ सोचना पड़ता। आखिर वह अपना वोट खराब तो नहीं कर सकते।

हालांकि अभी नामांकन के लिए मंगलवार का दिन बचा है। लेकिन लगता नहीं कि उनके कद के आस पास का कोई उम्मीदवार नामांकन दाखिल करेगा। इसलिए लोग अभी से उनके पक्ष में मुखर हैं।

वैसे चुनावी शतरंज की बाजी का अंदाजा बहुत आसान नहीं होता, लेकिन यहां तो सब कुछ साफ है। क्षेत्र के जयराम कहते हैं कि उनकी जीत तो तय है। बस यही देखना है कि उनके करीबी प्रतिद्धंदी को कितने वोट मिलते हैं।

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