फार्च्यूनर, रिवाल्वर चोर तो पकड़ा गया, क्या असली मामला हत्या जैसे अपराध का था?
अभियुक्त आरिफ के बयान में खतरे की साजिश देख रहे ठेकेदार इसरार अहमद, कर रहे मामले के खुलासे व बदमाशों की गिरफ्तारी की मांग
नजीर मलिक
सिद्धार्थनगर। पिछले 21 मार्च को थाने के करीब से एक फार्च्यूनर कर व रिवाल्वर चुराने वाले शातिर चोर को इटवा पुलिस ने गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने चोरी गया रिवाल्वर भी बरामद कर लिया है। कार पहले ही बरामद की जा चुकी है। पुलिस को गिरफ्तार वाहन लिफ्टर के चार अन्य साथियों की अभी भी तलाश है। लेकिन इस घटना के पीछे छिपे घातक रहस्य की परतें खुलना अभी बाकी है। क्या घटना के पीछे इसरार अहमद अथवा उनके परिवार को किसी जोखिम में डालने की योजना थी, इस बात की जांच जरूरी हो गई है। इस सनसनीखेज मामले की पूरे मंडल में चर्चा है।
बताया गया कि मुखबिर की सूचना पर इटवा पुलिस ने डुमरियागंज-इटवा मार्ग स्थित करहिया पुल के पास सहकारी समिति के सामने दविश देकर एक व्यक्ति को पकड़ा तो उसके पास से एक रिवाल्वर मिला, जो पिछले 21 मार्च को फार्च्यूनर कर के साथ चुराया गया था। गिरफ्तार अभियुक्त का नाम मोहम्मद आरिफ है। वह बगल के थाना डुमरियागंज के ग्राम भरवठिया मुस्तहकम का निवासी है। बताया जाता है कि उसके बारे में छानबीन के तहत दर्जनों मोबाइलों को सर्विलांस पर रखा गया, तब सटीक जानकारी मिल पाई। तत्पश्चात उसे पकड़ गया। उसने अपने अन्य चार अन्य साथियों के नाम भी बताये तो हैं मगर पुलिस उन्हें पकड़ने पर कोई तेजी नहीं दिखा रही है। फिलहाल आरिफ को भेज दिया गया है।
बताते चलें कि इटवा थाने के ग्राम झकहिया निवासी जिला पंचायत सदस्य इज़हार अहमद 21 मार्च को अपने पिता इसरार अहमद की फार्च्यूनर कार लेकर इटवा में थाने के निकट की मस्जिद में तरावी की नमाज़ पढ़ने गए थे। उस वक्त उनकी रिवाल्वर भी कार में ही थी। लेकिन जब वह रात 9.30 बजे नमाज पढ़कर निकले तो उनकी कार गायब थी। फार्च्यूनर जैसी हाई सिक्योरिटी प्रणाली की कार के लॉक को खोलना आश्चर्य की बात थी। बहरहाल यह बदमाशों की बदकिस्मती थी कि उन्हें मनिकापुर गोडा में गाड़ी छोड़ कर भागना पड़ा, लेकिन रिवाल्वर वे साथ ले गये।
घटना का खास मोड़ यह है
लेकिन इस घटना का एक महत्वपूर्ण पहलू भी हैं। पकड़े जाने पर अभियुक्त आरिफ ने थाने पर कुछ इस प्रकार की बातें की जिनसे लगता है कि 35-40 की कीमत वाली कार के चुराने में उसकी कोई दिल्चस्पी न थी। उसने थाने पर जुटे लोगों के सामने बताया कि उसे उसे बड़ा काम करना था। वह बड़ा काम क्या था, इसे उसने नहीं बताया। आरिफ के इस कथन को पुलिस ने भले ही गंभीरता से न लिया हो, मगर जिले के प्रसिद्ध कान्ट्रैक्टर इसरार अहमद को जानने वाले वाले लोग इसका अर्थ समझ गये होंगे। स्वयं इसरार अहमद भी इस कथन का भाव समझते हैं। उन्होंने बातचीत में इस आशंका से इंकार नहीं किया और कहा- अभियुक्त के इस कथन से उन्हें अपने या अपने परिवार की जान का खतरा सा लगता है। मुमकिन हो कि कार उठाने के पीछे भी यही मकसद रहा हो, मगर उस समय कार सवार इसरार अहमद के बेटे व जिला पंचायत सदस्य इजहार अहमद नमाज पढ़ कर कई लोगों के साथ्र निकल रहे हों और पकड़े जाने की आशांका में बदमाश जल्दी में कार लेकर भाग निकलें हों।
पहले भी फंसााये जा चुके हैं इसरार अहमद
अब अभियुक्त का यह कथन कितना सत्य है यह जांच का विषय है? मगर यह भी वास्तविकता यह है कि इसरार अहमद के दुश्मन भी हैं। साल दो साल पहले भी उन्हें एक हत्या के केस में फंसाया गया था। मगर वे पाक साफ बच निकले थे। इसरार अहमद जिले के बड़े कान्ट्रैक्टर हैं। राजनीति में भी दखल रखते हैं। सो उनसे इस प्रकार की दुश्मनी संभव है। उनके अनुसार मुमकिन है कि उनके दुश्मन उनका या उनके परिवार का अहित कराने के लिए भाड़े के अपराधियों का सहारा लिए हों। वैसे भी आरिफ शातिर वाहन चोर भी नहीं था कि फार्च्यूनर जैसी हाई टेक्निक कार का लाक आसानी से खोल सकें। लिहाजा पुलिस को इस मामले की जांच गंभीरता से करनी होगी और बाकी बचे अभियुक्तों को पकडना होगा ताकि साजिश की जड़ तक पहुंचा जा सके।






