कांग्रेस को गठबंधन से बाहर करने की खबर पर सिद्धार्थनगर भाजपा में राहत की सांस

December 20, 2018 2:24 pm0 commentsViews: 1987
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नजीर मलिक

सिद्धार्थनगर।मुख्य धारा की मीडिया ने पक्के सूत्रों से खबर दी है कि सपा बसपा गठबंधन से कांग्रेस को अलग रख जायेगा। इस गठबंधन के रद होने की संभावना  से यूपी में भारतीय जनता पार्टी ने रहत की सांस ली है। इस खबर के सार्वजनिक होने के बाद सिद्धार्थनगर जिले में नये राजनीतिक समीकरण बनने के आसार खड़े हो गये है।भाजपा जहां गठबंधन न होने से बेहद प्रफुल्लित है वहीं गठबंधन खेमे में कांग्रेस की ओर से मृस्लिम प्रत्याशी उतारने की आशंका में कुछ परेशान सी दिख रही है।

भाजपा की खुशी का कारण

जिले की इकलौती लोकसभा सीट डुमरियागंज मुस्लिम बाहुल्य है। यहां भाजपा बनाम संयुक्त विपक्ष की लड़ाई में भाजपा वोटों के समीकरण में हलकी पड़ती है। ३० प्रतिशत मुस्लिम, १७ प्रतिशत अनुसुचित, तथा २७ फीसदी पिछड़ा वर्ग के वोटो में से ८ फीसदी यादव व ५ फीसदी अन्य पिछड़ा वर्ग के मतों के करण संयुक्त विपक्ष के पक्ष में कुल ६० प्रतिशत मतों का रुझान बनता है। दूसरी तरफ पिछडा वर्ग में शेष बचे १४ फीसदी और २६ फीसदी सवर्ण मतों के साथ भाजपा का योग ४० प्रतिशत ही हो पाता है।

परन्तु गठबंधन न होने की दशा में कांग्रेस व पीस पार्टी द्धारा मुस्लिम उम्मीदवार उतार देने के कारण उम्मीदवार मुस्लिम मतों में जबरदस्त बिखराव होने की दशा में भाजपा की राह आसान हो जाती है। और भाजपा प्रत्याशी चुनाव जीत जाता है। पिछले चुनावों में इसका परिणाम देखा भी जा चुका है। यही भाजपा के राहत के लिए सांस लेने की असली वजह है।

डुमरियागंज सीट पर क्या हो सकती है विपक्ष की सूरत   

सपा बसपा कांगेस गठबंध टूटने की स्थिति में यह तय है कि सपा और बसपा संयुक्त रूप से अपना एक ही प्रत्याशी उतारेगी। कांग्रेस का अपना अलग प्रत्याशी होगा। गठबंधन न होने की दशा में काग्रेस की ओर पूर्व सांसद हाजी मुहम्मद मुकीम के चुनाव लड़ने की पूरी संभावना है। सपा बसपा की तरफ से भी बसपा के आफताब आलम की उम्मीदवारी एक दम तय मानी जा रही है। ऐसी दशा में मुस्लिम वोट बसपा और कांग्रेस में विभाजित होंगे।

गठबंधन की दशा में आफताब आलम को १७ प्रतिशत दलितों व 8 प्रतिशत यादवों व 5 फीसदी अन्य पिछडों के वोट मिल सकते है। अगर आफताब आलम के बजाये सपा के माता प्रसाद पांडेय को उम्मीदवार बनाया जाता है तो भी मुस्लिम मतों के बिखराव पर कोई फर्क पड़ने वाला नही है। उलटे दलित मतों का भी एक वर्ग छिटक कर भाजपा की तरफ जा सकता है। जातीय समीकरण के इस दौर में ऐसे किसी भी हलात का फायदा उठाने का भाजपा भरपूर प्रयास करेगी।

कैसे होगी क्षति की भरपाई

अब मतों के विभाजन से होने वाली संभावित क्षति को कांग्रेस उम्मीदवार और सपा बसपा के संयुक्त प्रत्याशी कैसे भरपाई करेंगे, यह महत्वपूर्ण सवाल है। सपा बसपा का संयुक्त प्रत्याशी के पास कम से कम १४ फीसदी पिछड़ा वर्ग के मतों को अपने पक्ष में लने के चांस भी हैं, मगर कांग्रेस उम्मीदर किस पर दांव लगायेगा, यह साफ नही है, क्योंकि डुमरियागंज सीट पर कांग्रेस का अन्य कोई जातीय आधार नहीं है। सो ताजा समीकरण के आधार पर भाजपा खेमे के प्रफुल्लित होने के पूरे कारण हैं, मगर अभी न तो भाजपा उम्मीदवार का एलान हुआ है न गठबंधन की अधिकृत घोषणा। इसलिए अभी प्रतीक्षा करिए और नये अप डेट के लिए कपिलवस्तु पोस्ट पर नजर बनाये रखिए।

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