Exclusive– दारोगा अयूब की मेहनत से किसमाती को मिला सात साल पहले गायब हुआ बेटा

February 8, 2017 5:02 pm0 commentsViews: 422
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––– इंसानियत जिंदा है

नजीर मलिक

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                         किसमाती देवी का बेटा अमित

सिद्धार्थनगर। पुलिस के सीने में दिल और इंसानियत के लिए जज्बा होता है। इसी जज्बे के तहत बिहार के दारोगा मो. मो अयूब ने सिद्धार्थनगर के एक गुमशुदा बच्चे को सात साल बाद उसकी मां किसमाती देवी से मिला दिया है। बच्चे को पाकर किसमाती देवी उस दारोगा को दुआएं दे रही है।

बिहार के पश्चिमी चम्पारन जिले के बगहा थाने के दारोगा मो.आयूब को सूचना मिली थी कि उनके थाने के गांव परसा खोड़ा में सुरेश सोनी के घर पिछले सात साल से एक बच्चा पल रहा है। वह बच्चा अपने गांव का पता नहीं बता पा रहा। वह केवल मनिकौरा गांव, ढेबरुआ चौराहा ही बता पा रहा है। दरअसल जब वो गायब हुआ था तो उसकी उम्र ६ वर्ष की थी, इसलिए पता बताने में असमर्थ था।

 कैसे हुई खोज

बहरहाल थानाध्यक्ष मो अयूब ने इसकी खोजबीन शुरू की। अपने साथी दारोगाओं से इस विषय में चर्चा की।बताते हैं कि कई महीने बाद १ फरवरी को किसी साथी पुलिस वाले ने बताया कि मनकौरा गांव व ढेबरुआ चौराहा सिद्धार्थनगर जिले में है। इसके बाद उन्होंने ढेबरुआ थाने से सम्पर्क कर पूरी जानकारी दिया।

ढेबरुआ पुलिस ने मामले की छानबीन की तो मनिकौरा गांव में किसमाती देवी मिले जिसका  ६ साल का बच्चा अमित पासवान  गायब हो गया था। इस घटना के बाद किसमाती देवी बिहार के बगहाथाने पहुंची और प्रमाण पेश किया तो अमित को पाल रहे सुरैश सैनी ने बाखुशी अमित को उसकी मां को सौंप दिया।

 कैसे गायब हुआ था अमित

सातसाल पहले बेवा किस्माती देवी अपने किसी बीमार रिश्ते को देखने दिल्ली गई थी। उसके साथ ६ साल का अमित भी था। वापसी में वह बस से आ रही थी। बस गजरौला स्थित एक ढाबे पर खने पीने के लिए रुकी। इसी दौरान अमित घूमते हुए बिहार जाने वाली बस में चढ गया। बसचली तो कुछ देरे बाद वह रोने लगा। वह छोटा हाने केकारण कुछ बता भी नहीं पा रहा था।  उसे रोता देख सुरेश सैनी को तरस आया और वह अमित को अपने साथ ले आया। मां किसमाती देवी ने गजरौला में कई दिन रोते कलपते बेटे को ढूंढा और थक हार कर घर वापस आ गई।

 गांव में जश्न

अमित अब तेरह साल का हो चुका है। वह गायब होने की पूरी कहानी नही बता पाता। उसे सुरेश जिन हालात में पाया था, वही बात सुरेश से जानकर लोगों को बता रहा है। लेकिन उसके गांव में आने पर जश्न का माहौल है। उसे देखने जाे भी आ रहा है दारोगा अयूब को अशीर्वाद देना नहीं भूलता है। गांव वाले दारोगा की बलैंया लेते नहीं थक रहे हैं।

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