सिद्धार्थनगर: कटहा बरदहा के ग्रामीण उतरे घोंघी नदी के पानी में कहा- पुल नही तो वोट नहीं
अजीत सिंह
सिद्धार्थनगर। लोकतंत्र में जब जनता के सब्र का बांध टूटता है तो उसका गुस्सा सड़कों और पानी के बीच साफ नजर आने लगता है। जिले में एक ऐसी ही सुलगती हुई तस्वीर सामने आई है जहां बुनियादी सुविधाओं से वंचित जनता ने अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। कटहा और बरदहा ग्राम सभा के बीच बहने वाली घोघी नदी के तट पर सैकड़ों ग्रामीण और युवा हाथों में बैनर लेकर सीधे पानी में उतर गए और ‘पुल नहीं तो वोट नहीं’ के नारों के साथ कड़ा विरोध प्रदर्शन किया।
मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को जिले के उसका विकास खण्ड के अंतर्गत ग्राम कटहा और बरदहा के ग्रामीण वर्षों से नाली सड़क शुद्ध पानी की उपेक्षा और पुल न होने से परेशान होकर घोघी नदी के पानी में उतर गए। उन्होंने ‘पुल नहीं तो वोट नहीं’ का नारा देते हुए आगामी चुनावों के बहिष्कार का ऐलान किया है। इस पुल के बनने से 20 किमी का घुमावदार रास्ता मात्र 4 किमी का हो जाएगा और नेपाल सीमा तक रास्ता सुलभ होगा।
ग्रामीणों के मुताबिक पुल के अभाव में कटहा और बरदहा के आसपास के दर्जनों गाँवो के लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि लोग अब मजबूरी में गांव से पलायन करने लगे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पुल न होने के कारण व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है, बच्चों की उच्च शिक्षा के रास्ते में बाधा आ रही है और किसी भी आपात कालीन चिकित्सीय जरूरत के समय पर अस्पताल पहुंचना असंभव सा हो जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार घोघी नदी पर पुल न होने से उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए लंबा चक्कर काटना पड़ता है। वर्तमान में जो दूरी तय करने में 20 किलोमीटर का फेरा लगता है वह पुल बन जाने के बाद मात्र 4 किलोमीटर रह जाएगी। इस पुल के निर्माण से केवल स्थानीय आवागमन ही सुगम नहीं होगा बल्कि यह सीधा रास्ता नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों से भी जुड़ जाएगा। इससे पूरे इलाके में व्यापार, शिक्षा और विकास के नए द्वार खुलेंगे।







