हाय रे नसीबां- डीएम की घोषणा के आठ माह बाद भी जुगिया को नहीं मिला आवास, गूंगे-बहरे भी अवास से वंचित

January 17, 2021 1:24 pm0 commentsViews: 296
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निज़ाम अंसारी


जुगिया के साथ उसके व सोमई के जीर्ण शीर्ण आवास

शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर। प्रदेश सरकार भले ही गरीबों को पीएम आवास दिलाकर लाभान्वित करने का दावा कर रही है। लेकिन अभी भी बहुत से गरीब परिवार इस योजना से वंचित हैं। इनमें वे भी शामिल हैं जो गूंगे और बहरे हैं। भयानक ठंड में आवास विहीन इन गरीबों को भयानक ठंड में भी मदद करने वा कोई नहीं है। इन्हीं में जुगिया नाम की एक गरीब भी है, जिसको आवास देने की घोषणा खुद जिलाधिकारी ने की थी। लेकिन वह भी लाल फीताशाही में उलझ कर छटपटा रही है।

बढ़नी विकास खंड के ग्राम खैरी उर्फ झुंगहवा निवासी जुगिया भी आवास से वंचितों में से एक है। ये बहुत गरीब परिवार से है, जिसका मकान सड़क चौड़ीकरण में टूट गया था। एक समाचार में छपे न्यूज़ के माध्यम से जिला अधिकारी दीपक मीणा जी ने बढ़नी बीडीओ  द्वारा जुगिया के मकान का जाँच करवायी। गयी जाँच में सब कुछ सही पाया गया बीडीओ बढ़नी व जिलाधिकारी द्वारा जुगिया को आश्वासन दिया गया कि जल्द आपका मकान बन जायेगा । बीडीओ   साहब का ट्रांसफर हो गया

जिलाधिकारी व बीडीओ  के आश्वासन के 8 महीने बाद भी जुगिया को आवास न मिल पाना सरकार और सरकारी कारिंदों की असंवेदनशीलता साबित करता है। बेचारी जुगिया आज भी खुले आसमान के नीचे जीवन यापन कर रही है। छत के नाम पर कुछ भी नहीं है। जिससे ठंड गर्मी बारिश में मुसीबत से जिंदगी काट रही है। इस दौरान सामान भी खराब हो जाता हैं। जुगिया बहुत गरीब परिवार से हैं। मजदूरी कर जैसे-तैसे तीन बच्चों सहित पांच लोगों का भरण पोषण कर रही हैं।

उसी गांव में  एक और गरीब परिवार सोमई रहते हैं। वह बोल नही सकतेयानी गूंगे है। उनकी पत्नी दोनों आखों से देख नही सकती।इस निरीह और असहाय जोड़ी के दो छोटे छोटे बच्चे हैं।जिनका सोमई मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण कर रहे, लेकिन रहने को घर नही है। उनकें भी घर नहीं मिला है। इसलिए कि उनके पास सरकारी प्रथा पूरी करने केलिए देने को रिश्वत नहीं है। यही हाल गाँव के कई गरीब परिवारों का है जो सरकार और प्रशासन की ओर आस भरी निगाहों से देख रहे हैं।  जबकि गाँव के  कई ऐसे परिवार को आवास दिया गया जिनके पास पहले सेनिजी आवास थे।  

इस ठंड भरी रात में बिना आवास  के ऐसे परिवार को रहने के लिए  कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता होगा, यह सोचने की बात है। मगर कोई सोचे तब न?दिन रात  कम्बलवितरण कर फोटो खिचा कर तडिया को देने वाले ऐसे नेताओं को भी नहीं पताकि उनके आस पास एऐसे बदनसीब भी रहते हैं।

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