Breaking News- पूर्वांचल का सबसे बड़ा राजनीतिक धमाका सोमवार को गोरखपुर में?

December 2, 2021 1:49 pm1 commentViews: 4693
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गोरखपुर का सबसे शक्तिशाली ब्राह्मण परिवार बनाएगा नया राजनीतिक घरौंदा, बसपा और भजपा को तगड़ा झटका?

पूर्व विप अध्यक्ष गणेश शंकर सहित विधायक विनय शंकर व पूर्व संसद कुशल तिवारी थामेंगे सपा का दामन?

 

नजीर मलिक

गोरखपुर। असन्न विधानसभा चुनावों के करीब आते ही राजनीतिक समीकरण तेजी से बनते बिगड़ते हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर में भी राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। खबर है कि राजनीतिक रूप से पूर्वांचल के सबसे शक्तिशाली ब्रह्मण पंडित हरिशंकर तिवारी का पूरा कुनबा बसपा छोड़ सोमवार को सपा में शामिल होने जा रहा है। विश्लेषकों को मानना है कि यह पूर्वांचल का सबसे बडत्रा राजनीतिक धमाका साबित होगा। इससे बसपा और भाजपा दोनों दलों को नुकसान की अशंका है और इस होने वाले नुकसान के डैमेज कंट्रोल को लेकर दोनों ही दल माथा पच्ची करने में शिद्दत से जुट गये हैं।

बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश के पूव विधान परिषद अध्यक्ष और बेहद गंभीर राजनीतिक व्यक्तित्व के मालिक गणेश शंकर पांडेय बसपा छोड़ कर समाजवादी पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। सूत्र बताते है कि इसके लिए सोमवार का दिन निश्चित किया गया है। इनके साथ चिल्लूपार के विधायक विनय शंकर तिवारी और संतकबीरनगर के पूर्व सांसद भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी भी हाथी की सवारी छोड़ कर साइकिल की रफ्तार बढ़ायेंगे। बता दें कि पूर्व सांसद कुशल तिवारी व विधायक विनय शंकर तिवारी कभी गोरखपुर के बाहुबली के रूप में चर्चित रहे व पूर्वांचल के सबसे बडे ब्राह्मण नेता पंडित हरिशंकर तिवारी के बेटे हैं। पूर्व विधान परिषद अध्यक्ष गणेश शंकर पांडेय पंडित हरिशंकर तिवारी के सगे भांजे हैं। हरिशंकर तिवारी का पूर्वांचल के ब्राह्मण समाज में बेहद मान सम्मान है। उनके सक्रिय राजनति से हटने के बाद उनके भांजे और दोनों बेटों ने उनकी इस विरासत को बेहद कामयाबी के साथ सभाल रखा है।

क्यों महत्वपूर्ण हो गया तिवारी परिवार

एक राजनीतिक दल से तीन नेताओं का एक साथ बाहर जाना आजकल सामान्य बात है। मगर गणेश शंकर, भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी व विनय शंकर का बसपा को बाय-बाय कहना आज के हालात में कुछ ज्यादा ही खास हो गया है। इसलिए कि आज जब मायावती ने सोशल इंजीनियरिंग के नाम पर बसपा के नम्बर दो नेता सतीश मिश्र के माध्यम से ब्राह्मणों को एक जुट करने में लगी है, ऐसे में एक प्रतिष्ठित ब्राह्मण घराने के तीन-तीऩ धुरंधरों का बसपा से अलग होना सामान्य बात नहीं है। जब बसपा बाह्मणों की एकजुटता का नारा दे रही हो तो तीन ब्रहमण नेताओं के विद्रोह को बसपा सामान्य कह कर नही निकल सकती। जाहिर है कि वह सियासी झटके से काफी आहत महसूस कर रही होगी।

भाजपा के लिए खतरे की घंटी

यद्यपि तीनों नेताओं ने बसपा के घर में सियासी आग लगाई है मगर उसकी तपिश से भाजपा भी महफूज नहीं रह सकती है। दरअसल भाजपा से ब्रह्मण समाज इस समय नाराज चल रहा है। ऐसे में पूर्वांचल में यह बात महत्वपूर्ण हो जाती है कि हरिशंकर तिवारी राजनीतिक रूप से किसके साथ हैं। वह अथवा उनका घराना राजनीतिक रूप से जिस ओर जाएगा, उनकी जमात का बड़ा वर्ग भी उधर ही झुकेगा। राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि इस घराने के सपा में शामिल होने से गोरखपुर समेत बस्ती, संतकबीरनगर, देवरिया, कुशीनगर व महाराजगंज समेत बनारस गाजीपुर, मऊ, बलरामपुर व गोंडा में व्यापक प्रभाव पड़ेगा जिसका लाभ यकीनन सपा के खाते में जाएंगा।

यहां यह भी बता देना जरूरी है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और हरिशंकर तिवारी के बीच छत्तीस का आंकड़ा है, लिहाजा यह परिवार यहां भाजपा को शिकस्त देने के प्रयास में कोई कमी नहीं रखना चाहेगा। वैसे ‘कपिलवस्तु पोस्ट’ पिछले 6 महीने से संकेत देता आ रहा है कि यह खेमा आज नहीं तो कल बसपा छोड़ सपा में जाएगा। यानी कपिलवस्तु पोस्ट अपने आंकलन मे सफल हुआ है। इस बार पुनः आंकलन है कि पंडित हरिशंकर तिवारी के सपा में आने से ब्राह्मण समाज का वोट बड़ी मात्रा में सपा को जाएगा तथा उसकी सीटें पूर्वांचल में काफी बढ़ेंगी, जबकि पहले के सर्वे में पूर्वाचल ही सपा की सबसे कमजोर कड़ी माना जा रहा था।

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