इटवा में हरिशंकर सिहं  की लोकप्रियता तय करेगी सभी के हार जीत का समीकरण

January 30, 2022 1:00 pm0 commentsViews: 1122
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फिलहाल बहुत कमजोर दिख रही भाजपा, उसके वोटों में तेजी से पैठ बना रहे पूर्व भाजपाई व अब बसपा प्रत्याशी हशिंकर सिंह

मुस्लिम मतों के लिए आपस में जंग करेंगे समाजवादी प्रत्याशी माता प्रसाद पांडेय व कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार अरशद खुर्शीद

नजीर मलिक

 


समर्थकों के साथ जनसम्पर्क करते बसपा नेता हरिशंकर सिंह

सिद्धार्थनगर। इटवा विधानसभा सीट से सभी प्रमुख दलों द्वारा अपना उम्मीदवार घोषित कर देने के बाद वहा के चुनावी जोर का खाका तैयार होने लगा है। सभी प्रत्याशी अपने अपने समीकरण तैयार करने में जुट गये हैं। आने वाले दिनों में समीकरण चाहे जो बने परन्तु दो माह पूर्व भाजपा छोड़ कर बसपा का दामन थामने वाले हरिशंकर सिंह की सक्रियता ने यह तय कर दिया है कि उनकी बढ़त या घटत पर कई प्रत्याशियों का भविष्य निभर्र है। तो आइए देखते है कि बसपा प्रत्याशी हरिंकर सिंह अचानक क्यों इतने महत्वपूर्ण हो गए हैं।

हरिशंकर की राजनीतिक पृष्ठिभूमि

1991 में भाजपा के तत्कालीन सांसद रामपाल सिंह के समय में हरिशंकर सिंह का भाजपा में तेजी से उदय हुआ और 2007 में इटवा क्षेत्र से भाजपा के उम्मीदवार बने। उस समय सपा के माता प्रसाद पांडेय और जावेद मुकीम के बीच मतों के जबरदस्त ध्रुवीकरण के कारण हरिशंकर सिंह तीसरे स्थान पर रहे। सन 2012 के चुनाव में उन्हें टिकट न देकर पूर्व विधायक जिप्पी तिवारी पर दांव लगाया गया , मगर वे भी हार गये। वर्ष 2017 में हरिशंकर सिंह की पुनः अनदेखी कर भाजपा द्वारा सतीश द्विवेदी को टिकट दिया गया और वे चुनाव जीते भी। सतीश द्विवेदी को तो जीत मिल ही गई मगर हरिशंकर सिंह को काफी सहानुभति मिली। इन तीनों चुनावों में हरिशंकर निष्ठा के साथ चुनावों में पार्टी के साथ लगे रहे। लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख के चुनाव में भी उनके साथ ज्यादती हुई और उन्हें चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया गया। इस घटना के बाद हरिशंकर सिंह के साथ जनता की सहानुभूति बढ़ने लगी और दो माह पूर्व उन्होने आजिज आकर भाजपा छोड़ बसपा का दामन थाम लिया। बकौल हरिशंकर सिंह भाजपा के स्थानीय विधायक व मंत्री द्वारा उनका निरंतर उत्पीड़न किये जाने के कारण उन्हें पार्टी छोड़ने को मजबूर होना पड़ा।

भाजपा फिलहाल कमजोर दिख रही

जहां तक भाजपा का सवाल है इटवा में शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी के टिकट की घोषणा होने के बाद सपा के दिग्गज नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय व बसपा नेता हरिशंकर सिंह के खेमे में खुशी देखी जा रही है। दोनों नेताओं का मानना है कि भाजपा प्रत्यासी के खिलाफ सत्ता की इनकम्बेंसी तो काम कर ही रही है। इसके अलावा भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे होने के कारण उनकी छवि खंडित हो चुकी है। माता प्रसाद पाण्डेय खेमे का मानना है कि सतीश द्विवेदी की घटती लोक प्रियता के कारण क्षेत्र के ब्राह्मण अब सपा को जायेंगे जबकि कि हरिशंकर सिंह का कहना है कि सतीश द्विवेदी के कमजोर होने पर उनके साथ के भाजपा समर्थक मेरे साथ रहेंगे। चूंकि हरिशंकर सिंह के पास बीस प्रतिशत दलितों के थोक वोट हैं, इसके अलावा उनके गृह क्षेत्र के आसपास के मुस्लिम वोट भी उनको ही मिलते रहे हैं इस लिए भाजपा का भाग रहा समर्थक वर्ग अन्ततः उनके साथ ही होगा।

माता प्रसाद पांडेय पर भी है खतरा

सपा प्रत्याशी माता प्रसाद पांडेय के बारे में आम ख्याल था कि इस बार उनकी जीत सुनिश्चित है। मगर अचानक बसपा के हरिशंकर सिंह व कांग्रेस के अरशद खुर्शीद की उम्मीदवारी ने उनकी उल्झनें बढ़ा दीं है। अरशद खुर्शीद गत चुनाव में माता प्रसाद को पीछे ढकेल कर दूसरें नम्बर पर रहे थे। उन्हें मुसलमानों का भारी समर्थन मिला था। जाहिर है कि मुसलमान उनके साथ इस बार भी शिद्दत से खड़ा होगा। ऐसे में यदि भाजपा से छिटका वोट सपा के बजाये बसपा की ओर गया तो सपा के लिए खतरनाक हो सकता है। कहने का मतलब यह है कि वोटों के इस समीकरणा में हरिशंकर सिंह जीत भी सकते है और सपा को हरा भी सकते हैं।

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