यादेंः इटवा का वह चुनाव जब वोटों की गिनती में हर राउंड पर ठहर जाती थीं सांसें

January 14, 2022 12:08 pm0 commentsViews: 2034
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आखिर 23 राउंड की गिनती के बाद माता पांडेय समर्थर्कों के चेहरे से छटी थी तनाव की लकीरें

जावेद मुकीम के खेमे में छाया था शमशानी सन्नाटा, सैकड़ों आंखें दिख रही थीं आंसुओं से तर

नजीर मलिक


सिद्धार्थनगर। जिले के चुनावी इतिहास में इतना रोचक और रोमांचक चुनाव कम देखने को मिलेगा जैसा इटवा विधानसभा क्षेत्र की वोटों की गिनती के दौरान 2007 में देखने को मिला था। इस मतगणना में हर एक राउंड की गिनती के बाद घोषणा होने के दौरान लोगों की सासें थमने लगती थीं। विजय किसके हाथ लगेगी, इसका अंदाज नामुमकिन था।

लड़ाई शेर और बकरी की?

दरअसल इटवा सीट पर 2007 का चुनाव सपा के माता प्रसाद पांडेय और तत्कालीन बसपा सांसद मुहम्मद मुकीम के पुत्र जावेद मुकीम के बीच था। जहां जावेद मुकीम को राजनीति का कोई अनुभव नहीं था, वहीं माता प्रसाद की गिनती शुमार प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं में होता था। लोग मानते थे कि माता प्रसाद पांडेय के अनुभव के सामने 27 साल का नौसिखुआ युवा कहां टिक पायेगा। मुकाबला शेर और बकरी का माना जा रहा था, लेकिन वास्तविक लड़ाई तो माता प्रसाद पांडेय और जावेद मुकीम के पिता व सांसद मुहम्मद मुकीम के बीच रजिनीतिक शक्ति परीक्षण की थी।।

बहरहाल चुनाव हुआ तो दोनों तरफ से बड़े बड़े दिग्गजों ने चुनावी कमान संभाली। नेता अभिनेता सभी ने इटवा स्थित इंटर कालेज के प्रांगण में किसी ने किसी की जनसभा करने आये। लोग जुटते सभा सुनते और जीत हार का गुणाभाग करते। चुनाव में जावेद मुकीम के पक्ष में स्वंय मायावती भी जनसभा करने आई थीं। इस तरह के धुआंधार प्रचार के बाद अंत में 23 अप्रैल को मतदान हुआ, जिसमें 1 लाख 26 हजार 7 सौ 61 लागों ने वोट डाले।

हर राउंड में मुकाबला कांटे का दिखा

9 मई को गिनती शुरू हुई तो मुकाबला बड़ा कांटे का दिखा। 8 में से 6 प्रत्याशी तो पहले राउंड से निरंतर मुकाबले से बाहर होते गये। 10वें राउंड तक मुकाबला सपा और बसपा के बीच बराबरी का दिखा। गिनती के दौरान हालत यह हो गई कि एक एक राउंड में एक एक वोटों के लिए मारामारी होने लगी। किसी राउंड में माता़ प्रसाद पाण्डेय सौ दो सौ वोटों से आगे होते तो अगले राउंड में जावेद मुकीम सौ दौ सौ वोटों से आगे हो जाते। इस प्रकार 15वें राउंड की गिनती तक सपा प्रत्याशी और विधानसभा अध्यक्ष रहे माता प्रसाद पांडेय 11 सौ मतों से आगे हो गये। लेकिन 19वें राउंड तक इस अंतर को काट कर जावेद मुकीम ने 173 वोटों की बढ़त बना ली। 20 वें राउंड में माता प्रसाद फिर 70 वोटों से आगे हो गये मगर 21 राउंड में जावेद मुकीम फिर से 79 मतों से आगे हो गये।

हर लम्हे बझ़ता जा रहा था तनाव

अब दोनों के मतगणना एजेंटों पर तनाव बढ़ने लगा। एजेंट जरा सा मौका पर एक दूसरे के एक एक मत की वैधता को चुनौती देने लगे। उधर मतगणना कैंप के बाहर बैठे दोनों प्रत्याशी अपने अपने सूत्रों से अंदर की जानकारियों बेचैनी से प्राप्त करते रहे। 21वें राउंड की गिनती शुरू हुई तो एक बार फिर दोनों बराबरी की स्थिति में थे। 22 राउंड में माता प्रसाद पांउेय ने 17 सौ वोटों की बढ़त बना ली।

अब केवल चार राउंड की गिनती शेष थी। 23 वें राउंड ने बसपा के जावेद मुकीम ने 4 सौ मतों की बढ़त कम करने में सफल रहे। 24वें राउंड में 15 सौ वोटों की हो गयी। 25 वें राउंड में जावेद मुकीम को माता प्रसाद पाण्डेय से 495 वोट अधिक मिले। इस प्रकार उन्होंने बढ़त का अंतर घटा कर 1 हजार पर ला पहुंचाया।

और अंतिम राउंड की वह मतगणा?

अब सब कुछ आखिरी राउंड की गिनती पर था। एक हज़ार का बढ़त बनाये माता प्रसाद पाण्डेय का खेमा कुछ राहत महसूस कर रहा था, मगर खतरा टला नही था। अगर जावेद मुकीम का वोट किसी बूथ पर बंम्पर निकलता तो उनकी जीत मुमकिन थी। मुकीम के समर्थक इसकी आशा भी कर रहे थे, क्यों की इस राउंड में कई मुस्लिम गांव भी शामिल थे। आखिरी राउंड की गिनती शुरू हुई तो हर मतगणना टेबल पर कड़ी टक्कर थी। इस राउंउ की गिनती में भी माता प्रसाद पांडेय को लगभग 12 सौ वोटों की बढ़त मिल गई। इस प्रकार 42950 वोट हासिल कर माता प्रसाद 2328 वोटों से विजेता बने जबकि उनके प्रतिद्धंदी जावेद मुकीम को 40622 मत के साथ हार का सामना करना पड़ा। फैसले के बाद जहां माता प्रसाद पांडेय खेमा अबीर गुलल उड़ा रहा था वहीं मुकीम के खेमे की सभी आंखें आसंओं से तर थीं।

(1960)

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