डुमरियांज सीट पर योगी-मोदी से वैर नहीं, गद्दारों की खैर नहीं, की चेतावनी किसके लिए?

March 28, 2024 1:39 PM0 commentsViews: 545
Share news

वायरल विडियो में बैदौला चौराहे पर हुआ भाषण किस उम्मीदार की नींद करेगा हराम, क्षेत्रीय जनता के बीच इस भाषण के निकाले जा रहे निहितार्थ

नजीर मलिक

चित्र परिचय—विडियो से लिय गया चित्र, (विडियो सुरक्षित है)

सिद्धार्थनगर। लोकसभा चुनाव की गहमा गहमी शुरू हो गई है। स्थानीय लोकसभा सीट भी उससे अछूती नहीं है। इसी गहमा गहमी के बीच होली के अवसर पर डुमरियागंज नगर पंचायत क्षेत्र में हुई एक जनसभा का विडियो जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है।विडियो में भाषण समेत एक नारा साफ सुनाई देता है कि योगी मोदी से बैर नहीं, गद्दारों की खैर नहीं। इसे देख कर जनता में एक सवाल उठ रहा है कि डुमरियागंज के भाजपा समर्थक हुजूम किस गद्दार की खैर न होने की बात कर रहा है।

बता दें कि डुमरियागंज के बैदौला चौराहे पर होली के दिन एक जनसभा का विडियो वायरल हो रहा है। विडियो में डुमरियागंज के पूर्व भाजपा विधायक राघवेन्द्र सिंह सम्बोधित करते बताये जा रहे हैं। (हालांकि कपिलवस्तु पोस्ट इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है) विडियो में कहा जा रहा है कि हम योगी जी और मोदी जी के साथ हैं, लेकिन गद्दारों के साथ नहीं हैं। इसीलिए कहा गया है कि “योगी मोदी से वैर नहीं, गद्दारों की खैर नहीं।”  इसी के साथ वहां मौजूद लोग इस नारे को पूरे जोश से दोहराते देखे जा सकते हैं। फिर भाषण आगे बढ़ता है।

पूर्व विधायक कहते दिखते हैं कि “मदारी हैं ऐसे लोग, जब रमजान का महीना आता है तो गोल टोपी लगा लेते हैं और जब सनातनी हिंदू अपनी ताकत का एहसास कराता है तब तो भगवा गमछा लपेट लेते हैं, ऐसे ही रावण भी था।” फिर वे सवाल उठाते हैं कि ऐसे गद्दारों से सावधान रहना चाहिए कि नहीं? जनता जवाब में उनकी बात के समर्थन में नारे लगाती है।फिर वहां इस बात के समर्थन में नारे गूंजने लगते हैं। कुछ जानकार बताते हैं कि यह यह चुटीली भाषा एक प्रत्याशी के लिए शुभ संकेत नहीं हैं।

अब सवाल है कि होली के अवसर पर उस भाषण के निहतार्थ क्या हैं? क्या उन्होंने पार्टी के भीतर छिपे किसी गद्दार की ओर इशारा किया है अथवा उनकी मंशा कुछ और थी? डुमरियागंज की संसदीय राजनीति को समझने वाले लोग यह बात आसानी से समझ सकते हैं कि यहां की राजनीति में “मदारी” शब्द किस राजनीतिज्ञ के लिए प्रयोग किया जा सकता है। यहां की जनता यह भी समझती है कि मुस्लिम समाज में कल तक रमजान में टोपी लगा कर बैठने वाला राजनीतिज्ञ कौन था, जिसने अब भगवा गमछा पहन लिया है? जनता समझदार है। वह समझती है कि इशारा किधर है? ऐसे में पाठकगण स्वयं अनुमान लगायें कि चुनाव में डमरियागंज में किस नेता के साथ क्या होने जा रहा है?

 

 

 

Leave a Reply