प्रतिदिन जलते खेत के साथ जलते जा रहे हजारों किसान परिवारों के अरमान

April 6, 2023 1:52 PM0 commentsViews: 297
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नजीर मलिक

गेंहूं की फसल जलने के बाद बिलखता किसान

सिद्धार्थनगर। पिछले 9 दिनों में अलग-अलग क्षेत्रों में आगलगी की घटनाओं से जिले की लगभग 800 बीघा गेहूं की फसल जल कर खाक हो गई। इनमें 200 से अधिक किसानों के संजोए अरमान भी जल गए, लेकिन अफसर इस तबाही से अनजान हैं। जिनकी फसल जली है, उनके घरों में नियमित चूल्हे नहीं जल पा रहे हैं।  उनके बच्चों की पढ़ाई, बेटियों की शादी का सपना बस समपना बनकर रह जा रहा है। अधिकारियों को नुकसान की जानकारी तब होगी, जब उनके पास लेखपाल की रिपोर्ट पहुंचेगी। ऐसी व्यवस्था में सभी किसानों को नुकसान का मुआवजा मिल पाएगा या नहीं, इस पर भी संशय है।
इस तबाही में फायर ब्रिगेड का समय पर न पहुंचना बड़ी वजह है। नहरों में पानी की कमी भी आग की लपटों पर भार पड़रही है। सर्वाधिक नुकसान बिजली के तारों से हुआ। बिजली महकमा के अधिकारियों को भी इस नुकसान की मुकम्मल खबर नहीं है। मंडी समिति के सचिव विजय सेन सिंह ने बताया कि ई डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर किसानों को आग से नुकसान का ऑनलाइन आवेदन करना होगा। उसके बाद राजस्व विभाग की रिपोर्ट लगेगी। फिर मुआवजा दिया जाएगा। 2.5 एकड़ की फसल पर 30 हजार, 2.5 से 5 एकड़ फसल पर 40 हजार और पांच एकड़ से अधिक फसल पर अधिकतम 50 हजार रुपये मुआवजा देने का नियम है।

मशीन की चिंगारी से जले सपने
बीते 6 दनों में अगलगी की घटनाओं पर गौर करें तो सूरते हाल स्पष्ट हो जाएगी। गत   28 फरवरी को खेसरहा थाना क्षेत्र के अंवारी गांव के सिवान में कंबाइन मशीन से निकली चिंगारी से दो बीघा फसल जल गई। दो अप्रैल को लोटन के महदेइया और विदाइया गांव में बिजली का तार टूटकर गिरने से गेहूं की 15 बीघा फसल नष्ट हो गई।  इसी प्रकार दो अप्रैल को मल्पारे गांव में 50 बीघा से अधिक फसल जलकर नष्ट हो गई। आगलगी का कारण अज्ञात है।तीन अप्रैल को इटवा में 250 बीघा और शोहरतगढ़ में 100 बीघा गेहूं की फसल जलकर खाक हो गई। यहां भी कारण स्पार्किंग ही था। मौके पर फॉयर विभाग से मदद नहीं मिली।

कई तहसीलों में एक साथ जले खेत

इसी तरह चार अप्रैल को इटवा में 200 बीघा फसल जल गई। यहां भी किसानों ने फायर ब्रिगेड पर आक्रोश व्यक्त किया।   पांच अप्रैल को उसका में 70 बीघा, शोहरतगढ़ के पकड़ी बाजार के 100 बीघा, डुमरियागंज में 30 बीघा और घोसियारी में छह बीघा फसल जल गई। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि  आग लगने  का कारण स्पार्किंग रहा तथा धिक फसलें जलने का करण दमकल में पहुंचने में देरी के साथ मौके पर जल की अनुपल्ब्धता रही।  इसके बावजूद प्रशासन इस प्रकार की विपदा का मुकाबला करने के लए दमकल की चुस्ती और नहरों मेंपानी की उपलब्धता सुनिश्चित नहींकर पा  रहा है।

अफसरों ने कहा
इस बारे में एडीएम उमाशंकर का कहना हैकि कितनी फसल जली है, इसका आंकड़े मेरे पास नहीं आया है। आपदा विभाग ने नुकसान की रिपोर्ट बनी होगी। तहसीलों की रिपोर्ट के अनुसार मंडी परिषद से मुआवजा दिया जाएगा।
जबकि अधीक्षण अभियंता विद्युत ए.के. पासवान के मुताबिक फसल जलने की रिपोर्ट मेरे यहां नहीं आती है। इटवा में बिजली से आग नहीं लगी थी, क्योंकि उस समय बिजली काट दी गई थी। राजस्व विभाग की रिपोर्ट के अनुसार मुआवजा दिया जाता है।

 

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