कब्र से निकाल कर महिला का शव पोस्टमार्टम को भेजा, विशषज्ञों को सबूत की उम्मीद नहीं

March 27, 2023 1:09 PM0 commentsViews: 299
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नजीर मलिक

डुमरियागंज कस्बा स्थित एक प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज के दौरान हुए मां और बच्चे की मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। पुलिस ने विवेचना के लिए पोस्टमार्टम कराने की जिलाधिकारी से अर्जी लगाई। उनके आदेश पर 69 दिन बाद शव को पुलिस ने कब्र से निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया है, जिससे मौत की असली वजह की जानकारी मिल सके। परिवार भी इस उम्मीद में है कि उसे न्याय मिले, लेकिन चिकित्सक और तमाम जानकार व चिकित्सक इसे कोरम पूर्ति कह रहे हैं। उनका कहना है कि इतने दिन बाद कब्र से लाश निकालकर उसका पोस्टमार्टम करवाने में रिपोर्ट से कुछ भी हासिल नहीं हो पाएगा। क्योंकि इतने पुराने मामले में वह भी अधिक रक्त गिरने से मौत की वजह का पुष्ट होना पाना नामुमकिन है।

त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के गनवरिया बुजुर्ग गांव निवासी रामधीरज यादव के मुताबिक 15 जनवरी को उन्होंने अपनी गर्भवती पत्नी गीता यादव को डुमरियागंज टाउन के खीरामंडी के स्थिति जीवन अस्पताल में उसे भर्ती करवाया, जहां चिकित्सक ने ऑपरेशन जरूरी बताकर दर्द का इंजेक्शन दिया। इसके बाद गर्भवती गीता की स्थित बिगड़ गई और अधिक रक्त गिर जाने के कारण मौत हो गई। 16 जनवरी को राप्ती नदी के तट पर अंतिम संस्कार करते हुए शव को जलाने के बजाए दफन कर दिया था। 20 जनवरी को अस्पताल संचालक के खिलाफ सीएमओ को शिकायती पत्र दिया। सीएमओ के आदेश पर बेवां के सीएचसी अधीक्षक ने डुमरियागंज थाने में आरोपी चिकित्सक डॉ. धीरज पर केस दर्ज करवाया था। जांच में जुटी डुमरियागंज पुलिस ने विवेचना के क्रम में पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जरुरत महूसस करते हुए जिलाधिकारी को पत्र लिखा था। उनके आदेश पर नायब तहसीदार डुमरियागंज आनंद ओझा की मौजूदगी में मां और बच्चे के शव को कब्र से बाहर निकलवाया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

परिवार और पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट से उम्मीद है कि कुछ हाथ लग जाए। लेकिन चिकित्सक और अधिवक्ता का तर्क है कि पुरानी लाश में पोस्टमार्टम के लिए कुछ बचता नहीं है। ऐसे में यह महज केवल कागजी की पूर्ति वाला कार्य है। वहीं डुमरियागंज थाने के प्रभारी निरीक्षक बिंदेश्वरी मणि त्रिपाठी ने बताया कि विवेचना में जरूरत थी, इसलिए शव को कब्र से निकलवाकर पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है।

विशषज्ञों के अनुसार पोस्टमार्टम से बहुत उम्मीद नहीं

विशेषज्ञों की माने तो इस प्रकार के मामलों में कब्र से लाश को अगर दो माह बाद निकाला जा रहा है तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुछ भी मिल पानी लगभग असंभव है। पीएम से उन्हीं मामलों में रिपोर्ट सकारात्मक आती है, जिसमें गंभीर प्रहार किया गया है और हड्डी आदि टूट गई हो। इसके अलावा किसी ऐसे धारदार हथियार से हमला किया गया है जो जिसे में हड्डी तक कट गई हो। यह फिर उसपर गहरी चोट आई होगी। अधिक रक्त के गिरने और दर्द के इंजेक्शन देने जैसे मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि होने की संभावना न के बराबर है। यह बचाव के लिए कागज की पूर्ति कहा जा सकता है।

रेलवे अस्पताल गोरखपुर के सेवानिवृत्त चिकित्सक डॉ.डीआर प्रजापति के अनुसार मां के रिपोर्ट तो अधिक रक्त गिरने के मामले में तो स्पष्ट नहीं होगा। अगर मौत के दूसरे या फिर तीसरे दिन पोस्टमार्टम होता तो पहले के ब्लड रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को देखने के बाद कारण स्पष्ट हो पाता। यह केवल कागजी कार्रवाई तक रहेगा।

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