भाजपा नेता हरिशंकर सिंह ने खुनियाव ब्लाक प्रमुख चुनाव की पहली बाधा किया पार, अभी से मिलने लगी शुभकामनाएं

April 22, 2021 3:23 pm0 commentsViews: 958
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नजीर मलिक


निर्विरोध निर्वाचित बीडीसी और पूर्व प्रमुख श्रीमती अंजू सिंह व ललिता सिंह

सिद्धार्थनगर। जिले के दो सबसे ब़ड़े ब्लाकों में से एक विकास खंड खुनियांव निवासी और इटवा विधानसभा क्षे़त्र के पूर्व भाजपा प्रत्याशी रहे हरिशंकर सिंह ने ब्लाक प्रमुख चुनाव की प्रारम्भिक बाधा पूरी कर ली है। अब उनकी बहू अथवा अनुज बहू में से किसी एक के ब्लाक प्रमुख बनने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।  जीतने की संभावना रखने वाले अनेक उम्मीदवार अभी से उनके परिवार देने की वादे करते दिख रहे हैं। लोग उन्हें निर्विराध निर्वाचन के साथ साथ भवी ब्लाक प्रमुा पद के लिए भी शुभकामनाएं दे रहे हैं।

90बिीडीसी वाले विकास खंड खुनियाव के प्रमुख पद जीतने की दृटि से वरिष्ठ भाजपा नेता हरिशंकर सिंह ने पहले से ही रणनीति बना ली थी। सहां का ब्लाक प्रमुख पद महिला के लिए आरक्षित है। यहां से उनके छोटे भाई की पत्नी श्रीमती अंजू सिंह प्रमुख भी रह चुकी हैं। उन्होंने इस बार भी वार्ड नम्बर 61 से पर्चा भरा मगर आश्चर्यजनक रूप से हरिशंकर सिह की पु़त्रवधू ललिता सिंह ने भी बगल के साठ नम्बर वार्ड से नामांकन दाखिल कर दिया। दरअसल सह हरिशंकर सिंह की रणनीति थी। कहीं कोई साजिश कर उन्हें असफल न बना दे, इसलिए उन्होंने कोई रिस्क लेने की अपेक्षा अपनी दो परिजनों का नामांकन कराया। मजे की बात यह है कि अनुज बहू और पुत्रवधु दोनो ही एक साथ निर्विरोध निर्वाचित हो गईं।

निर्विरोध निर्वाचन के बाद से ही उनसे सम्पर्क कर अपना समर्थन देने वालों का मिलना जुलना अचानक बढ़ गया है। जबकि अभी ब्लाक प्रमुख चुनाव महीनों बाद होने हैं। अभी तो बीडीसी का ही चुनाव चल रहा है। परन्तु लोगों को यह भंलीभांति पता है कि हरिशंकर सिंह की क्षेत्र में लोक प्रियता  निर्विवाद रूप से हैं। भाजपा में होने के बावजूद भी उन्हें अल्पसंख्यकों का भी अच्छा खासा समर्थन रहता है। यही नहीं इस बार देश और प्रदेश में भाजपा की सरकार है। ऐसे में उनको चुनौती देने वाला दूर दूर तक नजर नहीं आता है।

ले दे कर उनको पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय औ पूर्व सांसद मुकम्मद मुकीम के प्रत्याशियों से चुनौती मिल सकती थी। परन्तु अतीत में अपनी अपनी पार्टी की सरकारों के काल में इन दोनों नेताओं ने प्रशासन का इस्तेमाल अपने पक्ष में जिस प्रकार किया है, वह उन्हें याद ही होगा। सो उसे देख कर नहीं लगता कि वे दोनों नेतागण अपने दल के उम्मीदवार के लिए विपरीत परिस्थितियों में प्रतिष्ठा की लड़ाई लड़ सकेंगे। सत्ता पक्ष के एक मजबूत नेता से लड़ने में विपक्ष की ताकत आज के दौर में क्या होती है, दोनों नेता भलीभांति समझते हैं।

इस मामले में भाजपा समर्थक कौशलेन्द्र कुमार कहते हैं कि इस बार हरिंकर जी जरूरत पड़ने पर दोनों नेताओं को उन्हीं की राजनीतिक शैली में जवाब देने में सक्षम हैं। हां पार्टी के लोग भितरघात करें तो बात और है। जहां तक हरिशंकर सिंह का सवाल है, वह कहते हैं कि अभी तो बीडीसी के चुनाव ही नहीं हुए तो अभी क्या बोलें। वह पार्टी के प्रतिबद्ध कार्यकर्ता हैं। सदि पार्टी ने उन्हें लड़ने की इजाजत दी तो वह लड़ेंगे ही नहीं चुनाव जीत कर भी दिखाएंगे।

 

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