नवरात्रः आठ वर्ष बाद आया है विशेष संयोग

October 12, 2015 4:50 pm0 commentsViews: 471
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संजीव श्रीवास्तव

maa durgaमंगलवार से शरद नवरात्र का महापर्व शुरु हो रहा है। इस साल के नवरात्र में विशेष योग है, जो आठ साल बाद आया है। इस बार ग्रह स्थिति बुध आदित्य योग, उच्च के राहु तथा बुध और सिंहस्त वृहस्पति के होने से चल, अचल संपत्ति खरीदने और व्यापार के लिए विशेष लाभप्रद होगा।

यह ऐसा योग है, जो आठ साल बाद आया है। इससे पहले ऐसा योग 2007 में आया था, जिसमें चित्रा नक्षत्र जो दर रात्रि 4.38 तक तथा वैधृति योग जो रात्रि 11.17 बजे तक रहेगा।

इस बार विशेष रुप से अष्टमी, नवमी रात्रि दुर्गा पूजा तथा नवमी और विजय दशमी दोनों एक ही दिन मनायी जायेंगी। नवरात्रि दस दिन होने से दश महाविद्या की साधना का भी विशेष संयोग है। घट स्थापना मंगलवार के दिन घोड़े पर आयेंगी और गुरुवार को मनुष्यों की सवारी से जायेंगी, जिससे सुख और सौभाग्य में वृद्धि होगी।

जानिए मां के नौ रुप और उनकी पूजा से लाभ
1- शैलपुत्री- पवर्तराज हिमालय के जंम होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। मंगलवार की मां के प्रथम रुप शैलपुत्री की पूजा की जाती है।इनके पूजन से धन, धन्य मिलता है।

2-ब्रमचारिणी- मां दुर्गा यह दूसरा रुप है। यह रुप भक्तों को अनंत कोटि फल प्रदान करती हैं।

3- चन्द्रघंटा- यह मां का तीसरा रुप है। इनकी उपासना से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।

4-कुष्मांडा- मां का यह चतुर्थ रुप है। इनकी उपासना से रोग शोक दूर होते हैं।

5- स्कंदमाता- मां का पांचवां रुप है। इनकी पूजा से सम्मत इच्छाओं की पूर्ति होती है।

6- कात्यायनी- मां का यह छठवां रुप है। यह साधकों के दुद्यमनों का संहार करती हैं।

7- कालरात्रि- मां के इस सातवें रुप की उपासना से भक्तों का तेज बढ़ता है।

8- महागौरी- मां के इस आठवें रुप की उपासना से सुख में बृद्धि होती है।

9- सिद्धिदात्री- मां के नौवें रुप की आराधना से समस्त निधियों की प्राप्ति होती है।

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