निविदा के स्थान पर आलमीरा, गद्दे, बेड आदि की सीधी खरीद कर लाखों बनाये गये
व्यवस्था के लिए चुनौती बना एमपीटी मेडिकल कालेज का भ्रष्टाचार
नजीर मलिक
सिद्धार्थनगर। जिले का एमपीटी मेडिकल कालेज अपने भ्रष्टाचार को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहता है। लेकिन इस बार भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगा है। जिसमें लाखों के खरीद फरोख्त को सरकारी दिशा निर्देश के खिलाफ बताया गया है। समाज सेवी विजय प्रताप सिंह ने इसकी जांच की जिलाधिकारी से मांग की है। डीएम ने जांच का आश्वासन भी दिया है।
जिलाधिकारी को अपने पत्र में नियम कानूनों एवं तिथियों का हवाला देते हुए विस्तार से बताया गया है कि मेडिकल कालेज के प्राचार्य ने सभी नियमों को धता बता कर लोकसभा चुनाव की ओट लेते हुए सामानों का क्रय करना जरूरी बता कर आलमीरा, वार्डरोब आदि की सीधी सीघी खरीद कर लिया। जबकि इसके लिए निविदा जरूरी थी। विजय प्रताप सिंह ने पत्र में सवाल उठाया है कि ऐसी हालत में प्राचार्य को जिला र्निर्वाचन अधिकारी/ डीएम का अनुमोदन लेना चाहिए था, जो नहीं लिया गया। यही नहीं प्राचार्य ने निविदा के बाजाये सीधी खरीद की बात अपने पत्र में स्वयं स्वीकारा है।
इसके अलवा आई जी आर एस संख्या 40018824044126 के क्रम में प्रचार्य के 9 नवम्बर 24 के पत्र के अनुसार बेड और गद्दे की खरीद के लिए उपलब्ध बजट को टुकड़ों में बांट कर वित्तीय नियमों का उल्लंधन किया गया। इस प्रकार विभागीय पत्र संख्या जैसे दस्ताबेजी सबूतों के आधार पर विजय प्रताप सिंह ने मेडिकल कालेज के प्राचार्य पर भारी भरकम घोटाले के आरोप लगाये है। कहा जाता है कि यह रकम लगभग करोड़ में जाती है।
यहां यह बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में मेडिकल कालेज की भ्रष्ट कार्यप्रणाली को विपक्ष के नेता माता प्रसाद विधनसभा में खड़े होकर उठाते हुए कह चुके हैं कि उनके जिले के मेडिकल कालेज के लिए गुजरात से प्राचार्य आयात किया गया। शासन को यूपी में कोई योग्य प्रचार्य ही नहीं मिला। खैर उनकी बात असम्बली की थी, अब देखना है कि जिले के राबिनहुड समझे जाने वाले कलेक्टर राजा गणपति आर. कौन सा कदम उठाते हैं?





