इस्लामिक स्कालर व मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सेकेटरी स्व. रहमानी हुए सिपुर्दे खाक, मगर बिहार सरकार ने किया भद्दा मजाक

April 5, 2021 1:41 pm0 commentsViews: 141
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स्व. रहमानी को गार्ड आफ आनर देते समय पुलिस की राइफलों से नहीं निकलीं गाेलियां

 घटना पर मुख्यमंत्री नीतीश  कुमार को कार्रवाई नहीं तो अफसोस तो करना ही चााहिए था

नजीर मलिक

सिद्धार्थनगर। प्रख्यात धार्मिक स्कालर और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी रविवार को सिपुर्दे खाक हुए। उन्हें मुंगेर के खानकाह परिसर में ही अपने बुजुर्गों के पास तिरंगे झंडे में पूरे राजकीय सम्मान के साथ दफन किया गया। यह और बात है कि उन्हें गार्ड आफ आनर देते समय पुलिस वालों की राइफलें ही नहीं चल पाईं, जिससे सरकार की बड़ी फजीहत हुई। स्व. रहमानी का पिछले एक सप्ताह की बीमारी के बाद इंतकाल हो गया था। वे 77 वर्ष के थे। उन्होंने मुस्लिम युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जो यागदान दिया है वह हमेशा याद रखा जाएगा। इसी के साथ तमाम लोग गार्ड और आनर के दौरान हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर नीतीश कुमार की चुप्पी पर अफसोस जताया है।

10 में से मात्र 4 राइफलों से दी गई सलामी

खानकाह परिसर में ही उन्हें उनके दादा और उनके पिता की मजार के पास ही दफनाया गया। लेकिन इस दौरान बिहार पुलिस की एक बार फिर फजीहत हुई। स्व. रहमानी को राजकीय सम्मान दिए जाते वक्त जवानों की राइफल से फायर नहीं हुआ। राइफल फंस गई। बाद में एक अधिकारी ने राइफल को सही किया तब फायर हुआ। इसके बाद दूसरे जवान की राइफल अटक गई। फिर बाद में राइफल ठीक करके किसी तरह से 10 में से मात्र 4 राइफलों से उन्हें सलामी दी गई। जब ये सब हो रहा था, उस वक्त वहां मुंगेर डीएम, डीजी, एसपी सभी मौजूद थे।

क्या किसी के दबाव में चुप है नीतीश कुमार

कई संस्थाओं और फाउंडेशनों की मदद से गरीब और मेधावी युवाओं काे फ्री में उच्चे शिक्षा की व्यवस्था करने वाले स्व. वली रहमनी को गार्ड आफ आनर देते समय राइफलों से गोली न चलना एक गंभीर बात है। इससे तो यही लगता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रशासन पर कोई पकड़ नहीं रह गई है। उन्हें राजकीय सम्मान के साथ दफन किया जाना था, मगर हुआ इसका उलटा अैर नीतीश कुमार इस घटना पर अभी तक मूक दर्शक बने हैं। बिहार में चर्चा है कि उनकी खोशी इस बात की गवाह है कि वह बीजेपी के दबाव में चुप हैं। कई लोगों की राय है कि इसक लिए नतिीश कुमार को खेद तो जरूर ही व्यक्त करना चाहिए था।

बता दें कि स्व. वली रहमानी भारत के बड़े मुस्लिम विद्धानों में शुमार किये जाते थे। वह मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के महामंत्री थे। उनके पिता रूव. मिन्नतुल्लाह रहमानी इस बोर्ड के संस्थापक थे। उनके दादा ने मंगेर खानकाह की स्थापना की थी। वह मुस्लिम पर्सनल बोई के महामंत्री के अलावा बिहार, झारखंड व उड़ीसा के अमीरे शरीयत भी थे।

शनिवार को पटना में हो गया था निधन

मौलाना वली रहमानी का शनिवार को निधन हो गया था। मौलाना वली रहमानी बीते करीब एक हफ्ते से बीमार थे। दो दिन पहले ज्यादा तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पटना के पारस अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वली रहमानी साहब का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किए जाने का ऐलान किया था।

मौलाना के निधन पर विभिन्न सियासी दलों, सामाजिक संस्थाओं और शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने गहरे रंजो ग़म का इज़हार किया है।तालीमी बेदारी के सरपरस्त अख्तर हुसैन, दुबई, शमीम अख्तर अंसारी,अध्यक्ष डॉ वसीम अख्तर, महासचिव निहाल अहमद, प्रदेश अध्यक्ष सग़ीर ए खाकसार, इंजीनियर इरशाद अहमद खान (अलीग)ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मौलाना के  यूँ चले जाने से हम सभी सदमे हैं।हम लोगों ने शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले अभिभावक को खो दिया है।अल्लाह उन्हें जन्नतुल फिरदौस में जगह अता फरमाये।उन्होंने ‘रहमानी 30’ की स्थापना की है, जो गरीब बच्चों के डॉक्टर व इंजीनियर बनने के सपने को उड़ान दे रहा है।

 

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