सिद्धार्थनगर मेडिकल कालेज में नौकरी कर रहे डॉ. की खुली फर्जी डिग्री की पोल?

July 10, 2026 4:44 PM0 commentsViews: 339
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— नौकरी और एनाटोमी पीएचडी का कार्यकाल एक होने से खुला फर्जीवाड़ा

— एचओडी डॉ. नौशाद ने प्रमुख सचिव हेल्थ को भेजी फर्जीवाड़े की शिकायत

 

अजीत सिंह



सिद्धार्थनगर। नियमों को ताक पर रखकर और अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर सरकारी कुर्सियों पर काबिज होने का खेल नया नहीं है, लेकिन जब ऐसा किसी मेडिकल कॉलेज में हो, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। मामला सिद्धार्थनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज का है। आरोप है कि यहां तैनात एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हश्मतुल्लाह ने जिस पीएचडी डिग्री के दम पर यह स्थायी नौकरी हासिल की, वह पूरी तरह संदेह के घेरे में है।

​विभागाध्यक्ष डॉ. नौशाद आलम द्वारा शासन को भेजे गए दस्तावेजों के मुताबिक, डॉ. हश्मतुल्लाह साल 2013 से लेकर 2021 तक राजकीय मेडिकल कॉलेज जालौन (उरई) में कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर फुल-टाइम नौकरी कर रहे थे। उनका अनुभव प्रमाण पत्र भी यही गवाही देता है।

लेकिन अचरज की बात देखिए इसी पूर्णकालिक नौकरी के दौरान, उन्होंने जालौन से करीब 500 किलोमीटर दूर इंदौर की मालवांचल यूनिवर्सिटी से साल 2018 से 2021 के बीच एनाटॉमी विषय में पीएचडी भी कर ली।शिकायतकर्ता का साफ कहना है कि तकनीकी और कानूनी पद्धति के अनुसार, पार्ट टाइम पीएचडी तो मान्य है लेकिन इस दौरान यूनिवर्सिटी कैंपस में 200दिन की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य है जबकि नौकरी पर रहते हुए बिना उचित अवकाश या लीव के 500 किमी दूर इस तरह की डिग्री हासिल करना पूरी तरह से अमान्य और गैरकानूनी है। लेकिन कहानी में ट्विस्ट यहीं खत्म नहीं होता।

इस मामले में बड़ी आशंका एक बड़े फर्जीवाड़े से जुड़ती दिख रही हैं। जानकारों के मुताबिक, पिछले साल यानी 4 जुलाई 2025 को सीबीआई (CBI) की एक जांच में यह बात पहले ही पुख्ता हो चुकी है कि इंदौर की मालवांचल यूनिवर्सिटी द्वारा बड़े पैमाने पर फर्जी डिग्रियां बांटी गई थीं।

अब सवाल यह उठता है कि क्या डॉ. हश्मतुल्लाह की यह डिग्री भी उसी फर्जीवाड़े की खेप का हिस्सा है? और अगर ऐसा है, तो सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेज में नियुक्ति के समय उनके दस्तावेजों की स्क्रूटनी करने वाले जिम्मेदार अधिकारी सो रहे थे या फिर इस खेल में उनकी भी मिलीभगत थी?

​बहरहाल, कम्युनिटी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष की इस शिकायत ने मेडिकल कॉलेज से लेकर लखनऊ के प्रशासनिक गलियारों तक हड़कंप मचा दिया है। प्रमुख सचिव को पत्र भेजे जाने के बाद अब देखना यह होगा कि शासन इस पर कितनी जल्दी एक्शन लेता है और इस ‘हाई-प्रोफाइल’ डिग्री घोटाले की परते कब तक खुलती हैं।

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