सिद्धार्थनगरः सिर्फ नाम का है मेडिकल कालेज, सविधाओं का भयानक टोटा

November 4, 2022 1:32 PM0 commentsViews: 318
Share news

नजीर मलिक

सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के बाद से ही संसाधनों और सविधाओं का अभाव बना हुआ है। हालांकि एक साल से स्थानीय जिला चिकित्सालय को भी मेडिकल कालेज से संबंध कर दिया गया है इसके बावजूद भी अस्पताल में संसाधनों  का टोटो कायम है।चिकित्सालय में आईसीयू, ट्रामा यूनिट और कार्डियट यूनिट जैसी सुविधाएं नहीं होने से गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों का भी अभाव बना हुआ है।जिसके कारण जनता मेडिकल कालेज के वास्तविक लाभ से वंचित है।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर 2021 को मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण किया था, तो लोगों को उम्मीद जगी थी कि जल्द ही जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज के सुविधा संपन्न अस्पताल में रूप में आकार लेगा। एक साल बाद भी यह अस्पताल स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव से ऊबर नहीं पाया है। ट्रामा यूनिट नहीं होने के कारण मरीजों को रेफर कर दिया जाता है, जिनमें हादसे के मरीजों की स्थिति रास्ते में खराब होने की आशंका बनी रहती है। सर्दी के मौसम में हृदय रोगी बढ़ने वाले हैं। सर्दी से पहले ही हृदय रोगियों की चिंता बढ़ गई है कि कोई दिक्क्त आई तो निजी अस्पताल में जेब ढीली हो जाएगी, क्योंकि अस्पताल में हृदय रोग के विशेषज्ञ और न हार्ट यूनिट का न होना बड़ी समस्या है।

गौर तलब है कि जिले के सबसे बड़े अस्पताल में आईसीयू नहीं है, इस कारण किसी भी समस्या के गंभीर मरीज को रेफर करना मजबूरी बन जाती है। मरीज को वेंटीलेटर, सी पैक, बाई पैक की सुविधा नहीं मिल पाती है, उसे ऑक्सीजन की ही सुविधा मिल पाती है। बर्न यूनिट भी बंद है। डायलिसिसि यूनिट में पांच मशीन आई, लेकिन अनुमति मिलने में देर के कारण जरूरत के बावजूद मशीनें वापस चली गईं। मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव है। नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी, पीडियाट्रिक सर्जरी, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी, यूरोसर्जरी के डॉक्टर नहीं हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 1000 से 1200 मरीज पहुंचते हैं, जबकि 110 से 150 मरीज भर्ती होते हैं। सुविधाओं के अभाव में मरीजों को निजी अस्पताल में जाना पड़ता है।

वैसे तनिक सविधाएं जरूर बढ़ी हैं। मसलन पैथोलॉजी में 24 घंटे जांच हो रही है। माड्यूलर ओटी बन गई है। स्त्री एवं प्रसति रोग विभाग एमसीएच विंग में शिफ्ट हो गया। ट्रामा यूनिट का बजट प्राप्त हो गया है, जल्द ही निर्माण होने वाला है। ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट यूनिट का काम शुरू हुआ, लेकिन अधर में अटका है।

डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य

इस बारे में मडिकल कालेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ. एके झा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बाद जिला अस्पताल में सुविधाएं निरंतर बढ़ रही है। सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। मेडिकल कॉलेज में नियुक्तियां होंगी तो विशेषज्ञ डॉक्टर भी आएंगे। धीरे धीरे यहां सभ् व्यवस्था हो जाएगी। मडिकल कल कालेज अभी शैशवास्था में है। शासन से पत्रव्यवहार चल रहा है। व्यवस्था ठीक होने में कुछ समय लगेगा।

Leave a Reply