ग्राम शिवकोट में मोहाना पलिस ने बर्बरता की हद कर दी, कहीं कोई सुनवाई नहीं

October 5, 2020 3:35 pm0 commentsViews: 411
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— घर पर केवल महिलाएं ही थीं, फिर भी पुलिस ने तोड़ फोड़ मचाई, दरवाजा तोड़ा, कुंडी तक उखाड़ ले गये

अजीत सिंह

सिद्धार्थनगर।  जिले की मुहाना थाने की पुलिस ने एक पत्रकार के घर बर्डपुर नंबर 10 टोला शिवकोट  में 1 अक्टूबर 2020 की शाम 7 बजे पहुंचकर जिस बर्बरता का परिचय दिया है,  उस पर इलाके के लोग उंगलिया उठा रहे हैं, लेकिन मोहाना थानाध्यक्ष व उनके सहकर्मियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रहा है।

मुहाना पुलिस ने उक्त कार्यवाही इम्तियाज की पत्नी द्वारा 28 सितंबर को आईजी बस्ती परिक्षेत्र को  दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्र तथा माननीय न्यायालय जिला जज सिद्धार्थनगर पर इम्तियाज आदि की एंटीसिपेटरी जमानत की दरखास्त पडने के बाद नाराजगी में की  है। मुहाना पुलिस यह जानती थी कि घर पर कोई पुरुष सदस्य नहीं है, इसके बावजूद  पुलिस बल के साथ घर पर धावा बोलकर बर्बरता पूर्ण कार्यवाही करके महिलाओं का उत्पीड़न एवं उन्हें भयभीत किया गया।उनके साथ बदसलूकी और मारपीट किया। कमरे तथा बक्सो की तलाशी ली गयी। सामान को नष्ट किया गया।दरवाजा तोड़ा गया कुंडी उखाड़ के उठा ले गए और पूरा गांव पुलसिया आतंक की जद में आ गया। ।

एक पत्रकार और उसके परिवार की समाज में मान प्रतिष्ठा नष्ट करने का नियोजित  प्रयास किया गया। घटना 8 अगस्त  की है। ग्राम शिवकोटवा में  इम्तियाज और उनके दो भाई के बेटों के साथ पट्टीदार मन्नान की कहा सुनी हो गई जब इम्तियाज अहमद उनके साथ समाधान वार्ता कर रहे थे, तभी उनके घर के और रिश्तेदार लाठी डंडे के साथ वहां हमलावर हो गए। लड़के जावेद को चोट लगने के बाद बेहोश देख इम्तियाज अहमद जिला अस्पताल लेकर भागे और वहां भर्ती करा के उपचार कराया तथा वही चोटों का मुआयना किया गया। जबकि मन्नान और उनकी पत्नी की चोटों का मुआयना मुहाना पुलिस ने एक दिन बाद 9 अगस्त को करा कर एक तरफा एफ आई आर  धारा 147, 323, 504, 506, 452, 308, 269, 270, महामारी अधिनियम3, आपदा प्रबंधन अधिनियम 51ई, अपराध संख्या 0161/2020 बढ़ा चढ़ा कर लिखा।

 यही नहीं घटना में निर्दोष इम्तियाज व उनके अन्य भाई भतीजे जो बाहर थे, उन्हें नामजद अभियुक्त बना कर घर भर को फंसा दिया। जब इम्तियाज का लड़का जावेद अपने दो भाइयों को साथ लेकर मुहाना थाने पर अपना मुकदमा लिखाने पहुंचा तो प्रभारी निरीक्षक ने तहरीर लेकर उनके साथ अभद्रता पूर्ण व्यवहार किया तथा जेल भेज दिया। मुकदमा नहीं लिखा। जबकि जावेद की चोटों का मुआयना घटना के दिन का था।

इस घटना को तत्कालीन एसपी को बताया गया था। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर के अवकाश पर होने के नाते उन्हें पत्राचार व्हाट्सएप पर बताया गया तथा डीआईजी बस्ती से मिल कर 13 अगस्त विवेचक कार्यशैली एव कृत कार्रवाई से अवगत कराया गया। इसके उपरांत भी ना तो विवेचक को बदला गया और ना ही उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की गई?

बता दें कि मोहाना थाने की पुलिस की छवि निंतर गिरती ही जा रही है। वहां थानाध्यक्ष के कई कृत्यों ने समूचे पुलिस विभाग की छवि को खराब कर रखा है। लोगों में उनसे न्याय की उम्मीद खत्म होती जा रही है।  अब ऐसे लोगों को अगर थाने का इंचार्ज बनाया जाएगा तो अन्ततः उसका असर सरकार की छवि पर ही पड़ेगा।

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