मेडिकल कालेज के भष्टाचार की जांच के लिए एडीएम के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित
माता प्रसाद पांडेय का सवाल- क्या यूपीं में प्राचार्य पद के योग्य डाक्टर नहीं हैं
शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी भी उठा चुके हैं सदन से सड़क तक मामला
नजीर मलिक
सिद्धार्थनगर। भ्रष्टाचार व लापरवाही जैसे आरोपों से निरंतर सुर्खियों में रहने वाले स्थानीय एमपीटी मेडिकल कालेज पर निर्माण एवं टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता के हालिया आरोप के मद्देनजर जिलाधिकारी ने जांच कमेटी गठित कर दी है। अपर जिलाधिकारी के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी अभिलेख व साक्ष्य एकत्रित करने में जुट गई है। मेडिकल कालेज में भ्रष्टाचार व लापरवाही का मामला जिले के विधायक व नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय व शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी विधानसभा व सार्वजनिक मंचों पर भी उठा चुके हैं। माता प्रसाद पांडेय तो सदन में यहां तक कह चुके हैं कि मेडिकल कालेज को एक गुजराती के हवाले कर देने का राज क्या है? क्या उत्तर प्रदेश में प्रचार्य पद के योग्य लोग नहीं हैं। मगर वे दोनों कोई असर डाल पाने में विफल रहे। अब लोगों को जांच कमेटी की रिपोर्ट की प्रतीक्षा है।
मेडिकल कॉलेज में निर्माण कार्यों व टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता की शिकायत शपथपत्र के साथ डीएम से की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि नियम विरुद्ध तरीके से इंजीनियर हायर किए गए, 1000 हजार ब्रेकर की खरीद एक ही कंपनी से अलग-अलग तिथि में खरीदा गया है। इसके साथ ही एक बार खरीदे जाने वाले सामान को टुकड़ों-टुकड़ों में खरीदने और जिम के सामान को लागत मूल्य से अधिक खरीदने के भी आरोप लगाए गए हैं। मेडिकल कॉलेज की क्रय समिति में फेरबदल कर अपने मनमाफिक सदस्य चयन कर वित्तीय अनियमितता करने और कर्मचारियों का पटल परिवर्तन करने का आरोप लगाया गया है।
इसके अलावा एक ही दिन में टेंडर से होने वाली खरीदारी को चुनाव की आड़ में कोटेशन अर्थात एल-वन के माध्यम से खरीदारी करने और एक फर्म के माध्यम से 10 से ऊपर टुकड़ों में खरीदने का आरोप लगाया गया है, जबकि मेडिकल कॉलेज के वित्त नियंत्रक की ओर से कॉलेज के क्रय अधिकारी को पत्र भेजकर शासनादेश का हवाला देते क्रय संबंधी नियमों के पालन करने की अपेक्षा की गई थी। इस प्रकार के गंभीर आरोपों को देखते हुए जिलाधिकारी राजा गणपति आर ने जांच के आदेश जारी किये हैं।
बता दें कि इससे पूर्व भी क्रय समिति में शामिल अधिकारियों को बदलने, कर्मचारियों का पटल परिवर्तन करने व नोटिस देकर उत्पीड़न व शोषण कर धनउगाही करने के कई आरोप पहले भी लग चुके हैं।
मेडिकल कालेज में भ्रष्टाचार का खुला खेल इतना चर्चित हो चुका है कि मजबूरन नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय जी को भरे सदन में यह कहना पड़ा कि क्या प्रदेश में एक भी योग्य व्यक्ति नहीं है, जिसे मेडिकल कालेज का प्राचार्य बनाया जा सके। आखिर कौन सी मजबूरी है कि गुजरात से लाकर एक व्यक्ति को यहां थोप दिया गया है? हैरत है कि इतनी कड़ी टिप्पणी के बाद भी जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगा। यही नही इस मामले को शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने भी मेडिकल कॉलेज में अनियमितता का मामला उठाया था। इन आरोपों की जांच के बावजूद मामले में कार्रवाई नहीं होना चर्चा का विषय है। अब जिलाधिकारी की जांच कमेटी की रिपोर्ट कोई गुल खिला पायेगी, जिले वासियों को इसमें भी पूरा संदेह है।





