नेपाल के पीएम बालेन्द्र शाह के नए नियम से मचा बवाल, व्यापारियों में चिंता, विरोध प्रदर्शन शुरू

April 21, 2026 7:40 PM0 commentsViews: 306
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अजीत सिंह 

सिद्धार्थनगर। नेपाल की बालेन शाह सरकार ने भारत से 100 रुपये से ज्यादा का सामान खरीदने पर कस्टम ड्यूटी वसूलना शुरू कर दिया है। इसका सीधा असर आम लोगों पर खासकर दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ रहा है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ नेपाल देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं। नेपाल और भारत के लोग बिना किसी वीजा-पासपोर्ट के एक दूसरे के देश में आते-जाते हैं। लिहाजा इसका असर दोनों तरफ पड़ा है। सरहदी इलाकों में भारतीय कारोबारियों को बालेन शाह सरकार के इस फैसले से झटका लगा है। नेपाल सरकार अपने कुल राजस्व का लगभग 40% से 45% हिस्सा सिर्फ सीमा शुल्क और सीमा पर वसूले जाने वाले अन्य करों जैसे VAT और एक्साइज ड्यूटी से हासिल करती है। इसमें से सबसे बड़ा हिस्सा भारत-नेपाल सीमा के उत्तर प्रदेश और बिहार से लगने वाले बार्डर नेपालगंज, कृष्णानगर, ककरहवा, बीरगंज, भैरहवा, सोनौली और बिराटनगर से आता है।

नेपाल में पीएम के सख्ती के विरुध धरना देते नेपाली नागरिक

नेपाल में भारतीय सीमा के करीब रहने वाले लोग रोजमर्रा की जरूरतों जैसे नमक, खाना पकाने का तेल और दवा खरीदने तक के लिए भारत आते हैं और ऐसा वर्षों से होता आया है। नेपाल में सामान भारतीय बाजार के मुकाबले महंगे होते हैं इसलिए नेपाल के लोग भारत आना ज्यादा पसंद करते हैं। सीमा के दोनों ओर रहने वाले परिवारों के बीच रिश्तेदारी, सांस्कृतिक परंपराएं और आर्थिक निर्भरता एक जैसी ही है। कई लोगों के लिए सीमा पार करना उतना ही आम है जितना कि पास के किसी शहर में जाना। लेकिन नेपाल सरकार ने यहां से अपना खजाना भरने का फैसला कर लिया है और पीढ़ी दर पीढ़ी से चली आ रही रोटी बेटी के नाते को भी दरकिनार कर दिया है। नेपाली पीएम के इस सख्ती से नेपाल और भारत के बार्डर इलाके में रहने वाले लोगों में मानसिक तनाव बढ़ गया है।

नेपाल ने भारतीय उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी वसूलना शुरू किया

नेपाली कांग्रेस के सांसद डॉ. प्रकाश शरण महत ने इसे कानून में पेश किया था और 2023 में नेपाल सरकार ने 100 रुपये से ज्यादा के सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाना शुरू किया। हालांकि ऐसा करना इतना पेचीदा था कि इसे लागू नहीं किया गया। 2023 में जो कानून बना था उसके मुताबिक सामान के हिसाब से यह टैक्स 5% से 80% तक होता है। इसके तीन मकसद हैं- स्थानीय उत्पादन को बचाना, राजस्व बढ़ाना और छोटे पैमाने पर होने वाले बेकाबू आयात पर रोक लगाना। लेकिन नेपाली एक्सपर्ट्स का कहना है कि 100 रुपये की सीमा बहुत कम है। इसे बढ़ाकर कम से कम 1000 रुपये करना चाहिए।

 

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