डुमरियागंज की तीनों नगर पंचायतों की कमान होगी महिलाओं के हाथ, बदल गये समीकरण

December 6, 2022 1:37 PM0 commentsViews: 289
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नजीर मलिक

डुमरियागंज, सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज तहसील की तीनों नगर पंचायतें डुमरियागंज सदर समेत नगर पंचायत भारत भारी व बढ़नी चाफा महिलाओ के लिए रिजर्व कर दिये जाने से वहां के पुरुष चुनाव बाजों को बड़ा झटका लगा है। चुनाव लड़ने के लिए कमर कस रहे संभावित परतयाशी गण  अब या तो अपने परिवार की महिलाओं को चुनाव लड़ायेगे या फिर मैदान से हटेंगे, इस पर जम कर चर्चाएं शुरू हो गयी है। इससे पहले बन रहे चुनावी समीकरण भी बदलने के आसार नजर आने लगे हैं।

नगर पंचायत डुमरियागंज

सबसे पहले सदर यानी नगर पंचायत डुमरियागंज की बात करें तो यहां गत चुनाव में बसपा ने जीत हासिल की थी और जफर अहमद बब्बू चेयरमैन बने थे। जफर अब सपा में हैं और सपा से पराजित प्रत्याशी अतीकुर्ररहमान ने बसपा का दामन थाम लया है। दूसरी तरफ भाजपा से मकसूदन अग्रहरी तथा भाजपा के बागी और हिंदू युवा वाहिनी के तत्कालीन नेता श्यामसुंदर अग्रहरि चुनाव लड़े थे। इन चारों के बीच जबरदस्त टक्कर हुई थी। कमोबेश यही लोग इस चुनाव में भी टकराने की तैयारियां कर रहे थे लेकिन आरक्षण की सूची जारी हुई तो सभी की आशाओं पर तुषारापात हो गया।

अब तक जो खबर मिली है उसके मुताबिक बसपा नेता अतीकुर्रहमान अपने परिवार की महिला को चुनाव मैदान में उतारने के लिए तैयारी में लगे हैं। ऐसा ही मन भाजपा के संभावित प्रत्याशी मकसूदन अग्रहरि भी बना रहे है। मगर बर्तमान चेयरमैन जफर अहमद परिवार की किसी महिला को लड़ायेंगे इस बारे में संशय है। श्यामसुंदर अग्रहरि भी अभी पशोपेश में हैं। जाहिर है कि यदि इनमें से कोई भी मैदान से हटा तो यहां के चुनावी समीकरण में भारी बादलाव देखने को मिल सकता है।

बढ़नी चाफा व भारतभारी

जहां तक नगर पंचायत बढ़नी चाफा का सवाल है, यहां से सपा से टिकट के दावेदार और संभावित प्रत्याशी इस्लाम अली की तैयारियां पूरी है। उनके पिता हाजी चिनकन का अपना प्रभाव है। वह अतीत में भी अपनी बहू को प्रधान बनवाने में सफल रहे हैं। उनकी रणनीति इस बार भी बहू को लड़ाने पर ही होगी। इसी प्रकार कांग्रेस प्रत्याशी बब्बू नेता भी अपनी बहू या परिवार की अन्य  महिला को चुनाव मैदान में उतारने का मन बना रहे हैं।

नगर पंचायत भारत भारी में पहली बार चुनाव होने जा रहे हैं। यहां अभी इस बारे में कोई स्पष्ट राय नहीं है। संभावित उम्मीदवार अपने परिवार की महिलाओं को लड़ाये अथवा नहीं, इस पर विचार करने में लगे हैं। बहरहाल कौन लड़ेगा कौन नहीं यह तो समय बतायेगा, लेकिन अब तीनों नगर पंचायतों की बागडोर किसी न किसी महिला के ही हाथ में होगी, इतना तो तय है।

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