खेतों में सूख रहे किसानों के अरमान

September 20, 2015 4:52 pm0 commentsViews: 472
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संजीव श्रीवास्तव

 

dhanसामान्य से कम बरसात होने से किसानों की छटपटाहट बढ़ गयी है। खेतों में धान की फसल रेड़ने को तैयार है मगर पानी की कमी से उस पर ग्रहण लग गया है। जिस फसल में अब तक बालियां पड़ जानी चाहिए थी, उसके पौधे पीले पड़ गये हैं।

सिद्धार्थनगर धान की खेती के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है, मगर दो वर्षो से यहां के किसानों को धान की फसल में नुकसान उठाना पड़ रहा है। वर्तमान साल में धान की फसल के सूखे की भेंट चढ़ने की आशंका प्रबल हो गयी है। पूर्वा नक्षत्र में धान को पानी की सर्वाधिक आवश्यकता होती है, मगर इस वर्ष यह नक्षत्र बेपानी रहा। अब उत्तरा नक्षत्र भी किसानों को दगा दे रहा है। इससे किसानों के अरमानों को धक्का लग रहा है। इससे पूर्व धान की फसल हुदहुद की भेंट चढ़ गयी थी।

कृषि विभाग के अनुसार सिद्धार्थनगर में 70 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती की गयी है। इनमें से लगभग 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र नहरों एवं सरकारी नलकूपों के किनारे हैं, मगर नलकूपों की खराबी और नहरों में पानी न आने के कारण वहां की भी फसल सूखे से तबाह है।

ग्राम सेमरनार के किसान चन्द्र प्रकाश श्रीवास्तव, जगदीशपुर खुर्द हरिनारायण रस्तोगी, दतरंगवा के राजमन गौड़, बिनयका के मो हारुन आदि का कहना है कि दो नक्षत्रों के धोखे से धान की फसल चौपट हो गयी है। खेतों की भूमि फट गयी है। फसलों की सिंचाई से कोई फायदा नहीं है। उनके मुताबिक अगर एक सप्ताह के भीतर पानी नहीं बरसा तो वह पूरी तरीके लुट जायेंगे।

इस सिलसिले में उप कृषि निदेशक डा राजीव कुमार का कहना है कि इस वर्ष मानसून सामान्य से कम है। इस कारण धान की फसल प्रभावित हो रही है। अब अगर बरसात न हुई तो फसल सूख जायेंगी।

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