शोहरतगढ़ में पप्पू चौधरी हैं भाजपा की राह का रोड़ा, टिकट नहीं मिलने पर निर्दल लड़ेंगे चुनाव

January 18, 2017 4:43 PM0 commentsViews: 1990
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नजीर मलिक

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सिद्धार्थनगर। शोहरतगढ़ विधानसभा सीट पर भाजपा की कामयाबी की राह में पूर्व विधायक रवीन्द्र प्रताप उर्फ चौधरी ही रोड़ा बनते रहे हैं। सपा कांग्रेस के बीच समझौते और टिकट न मिलने पर भी चुनाव लड़ने का संकेत देकर उन्होंने भाजपा की उलझन फिर बढा दी है।

ज्ञात रहे कि शोहरतगढ़ से तीन बार विधायक रहे पप्पू चौधरी वर्तमान में कांग्रेस में हैं। कांग्रेस और सपा के बीच समझौता होने की खबरों से इस सीट केसपा के पास रहने की पूरी उम्मीद है। ऐसे में पप्पू चौधरी को किसी दूसरे दल या निर्दल के रूप में उतरना पड़ सकता है।

भाजपा में कभी पप्पू का था जलवा

एक वक्त था कि भाजपा में पप्पू चौधरी का जलवा था। १९९१ में यह सीट भाजपा के शिलला मित्तल ने जीती थी, लेकिन सिटंग एमएलए होने के बाजूद मित्तल का टिकट कट गया और ९३ में पप्पू चौधरी भाजपा के उम्मीदवार बने। उन्होंने ४७९६१ मत पाकर जीत हासिल की। यह वोट निवर्तमान विधायक शिवलाल मित्तल से ११ हजार अधिक था। १९९६ में उन्होंने ४६३४६ मत पाकर उन्होंने दूसरी जीत हासिल की। इसी दौरान पारिवारिक विवाद में हालात ऐसे बने कि उन्होंने भाजपा को अलविदा कह दिया।

भाजपा का पराभव शुरू

भाजपा से अलग होने के बाद २००२ में उन्होंने सपासे टिकट लिया, मगर कांग्रेस के दिनेश सिंह से कड़े मुकाबले में हार गये। भाजपा से उन्की पत्नी साधना चौधरी लड़ीं और २६२१२ वोटों से तीसरे स्थान पर रहीं।

२००७ के चुनाव में दिनेश सिंह सपा के उम्मीदवार बने तो पप्पू ने कांग्रेस के टिकट पर उन्हें ललकारा। इस  बार बसपा के मुमताज अहमद ने उन्हें कड़ी टक्कर दी। लेकिन बाजी पप्पू के हाथ लगी। दिनेश सिंह तीसरे व भाजपा की साधना चौधरी १८४५५ वोट पाकर चौथे स्थन पर खिसक गई। २०१२ में पप्पू चौधरी फिर हारे लेकिन भजपा प्रत्याशीसाधना चौधरी १६१५४ वोटों के साथ पांचवें नम्बर पर आ गई।

भाजपा को नया वोट बैंक बनाना होगा

ऊपर के आंकड़ों के साथ स्पष्ट है कि पप्पू चौधरी का वोट बैंक वही है, जो भाजपा का है। पप्पू चौधरी कुर्मी बिरादरी के हैं। इस बिरादरी का वोट पिछले पांच चुनावों से पप्पू चौधरी के साथ खड़ा है। अनुमान तो यही है कि जब पप्पू चौधरी मैदान में होंगे ताे कर्मी वोटों का बड़ा हिस्सा उन्हीं के साथ जायेगा। लिहाजा अगर भाजपा को जीत हासिल करनी हैं तो उसे नया बोट बैंक बनाना होगा। यह वक्त की पुकार है।

 

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