पीएचसी चेतिया में सालों से डाक्टर नहीं, कौन सुनेगा फरियाद

March 20, 2017 3:03 pm0 commentsViews: 207
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अमित श्रीवास्तव

hospital

मिश्रौलिया, बांसी तहसील के उत्तरांचल स्थित चेतिया बाजार का प्राथमिक स्वास्थ केन्द्र बदहाली की के आँसू बहा रहा है।यह केंद्र मरीजो के इलाज के लिए लाखों रूपया खर्च कर सरकार ने बनवाया था।इस अस्पताल पर डॉक्टर के साथ पूरे स्टाफ की पोस्टिंग भी की थी।मरीजों के लिए बड़े,डॉक्टर के लिए आवास,और अन्य कर्मचारियों के लिए आवास भी बनाया गया।

इस अस्पताल को क्षेत्र के मालीजोत, रुद्रपुर, बस्ठा,ठीकहा, चेतिया,तीवर,दसिया, चादेगाड़िया, नारायनपुर, तिघरा, असिधवा, थुम्हवा, जिगिना, मुडिला, नेउरी, छपिया, खिरिया, नवईला, मजगवा, पिपरा, घरहरा, नवतला, उड़वलिया, मऊ, छतवा, अशोगवा, कनकटी, बनकटा, कुर्थीया, बिड़रा, जोकईला सहित सैकड़ों गावों के लाखों लोगों के इलाज के लिए45 वर्ष पहले बनाया गया।जब अस्पताल बना तो लोगो में काफी ख़ुशी हुई।

वर्तमान में पिछले छःह वर्षो से यह अस्पताल डॉक्टर के इंताजार में है। यहाँ कोई डॉक्टर पोस्ट ही नहीं हुआ।अस्पताल पर छह कर्मचारियों की पोस्टिंग है, जो अस्पताल के समय मे अस्पताल पर आते हैं और समय ख़त्म होने पर वापस चले जाते हैं।डॉक्टर न होने से यह अस्पताल बेमतलब साबित हो रहा है।चाहे चिकित्सा अधिकारी का कक्ष हो या मरीजों के लिए बनाया गया वार्ड ,कर्मचारी आवास हो, सब खंडहर का रूप ले चुका है।

सभी कमरो में बड़े बड़े पेड़ उग गए है।सिर्फ मेंन बिल्डिंग जहाँ डॉक्टर के बैठने और दवा कक्ष है यही  कुछ हद तक ठीक है।अस्पताल पर हीरामन प्रयोगशाला सहायक, फार्मासिस्ट मो. इस्लाम, वार्ड बॉय रमेश चन्द्र, स्वीपर रमेश प्रसाद, एन.एम.ए. फूल चन्द गुप्ता, महिला हेल्थ वर्कर सूर्यमती त्रिपाठी की बाकायदा नियुक्ति है।लेकिन जब डॉक्टर ही नहीं है तो इनकी नियुक्ति का फायदा लोगों नहीं मिल पा रहा है। बिना डॉक्टर के मरीज अस्पताल पर आयेंगे ही क्यों।ग्रामीण राधेश्याम का कहना है कि इस अस्पताल पर सरकार को ऐसे डॉक्टर की नियुक्ति करनी चाहिए जो यहाँ निवास करे और मरीजों का प्राथमिक उपचार आसानी से हो सके।

ग्राम प्रधान पति राकेश गुप्ता का कहना है की डॉक्टर की नियुक्ति के साथ अस्पताल परिसर की बाउंडरी करायी जाये और खंडहर हो चुके बिल्डिंगों की मरम्मत करायी जाये ताकि अस्पताल के कर्मचारी अस्पताल परिसर मे रह सके।ग्रामीण सुदामा का कहना है कि इस अस्पातल पर डॉक्टर न होने के कारण हमलोगो को प्राथमिक उपचार के लिए या तो यहाँ से 12 किलोमीटर दूर बाँसी जाना पड़ता है या झोला छाप डॉक्टरों के चंगुल मे फंस कर लूटने की मजबूरी होती है।ग्रामीण हीरा लाल वर्मा का कहना है कि सरकार को इस अस्पातल के तरफ ध्यान देना चाहिए और डॉक्टर के साथ यहाँ मरीजो को जरूरी सुबिधाए मिलनी चाहिए।

 

 

 

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