पीएम रिपोर्ट के बाद भी नहीं सुलझ सका राम सजीवन की रहस्यमय मौत का राज़
राम सजीवन की मौत के पीछे छुपी हो सकटी है प्रेम प्रकरण की कहानी, इसलिए जांच की ज़रूरत
नज़ीर मलिक
सिद्धार्थनगर। शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के गनेशपुर निवासी बीस साल के रामसजीवन की मौत की गुत्थी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद भी नही सुलझ सकी है। उस युवक की मौत से जुड़े कई सवाल अभी भी चर्चा में हैं, जिसका जवाब बहुत ज़रूरी हो गया है। रामसजीवन का शव शनिवार को उसके घर से 25 किमी दूर बरैनिया गांव के निकट बानगंगा नदी में तैरता पाया गया था। जबकि शुक्रवार को वह घर से मुंबई जाने को निकल था। वैसे भी ग्राम बरैनिया के लोगों ने बताया कि जब युवक की लाश नदी से निकली गई तो उसके दोनों पैर बंधे हुए थे। लगता था जैसे किसी ने पैर बाधने के बाद उसे नदी में फेंक दिया हो।
युवक रामसजीवन के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना बताया गया है। यह डूब कर मारने पर भी संभव है और किसी को नदी में जीवित फेंक दिया जाय तो भी यही रिपोर्ट आएगी। अतः केवल पीएम रिपोर्ट के बल पर इसे डूबने से हुई मौत नहीं कहा जा सकता। अब यहां दो सवाल उठते हैं कि जब शव के पैर बांधने की बात सामने आ रही है तो पुलिस इस विंदु पर जांच क्यों नहीं कर रही है। सुनियोजित हत्या के सबूत आमतौर पर इतने भी हल्के नही होते की उड़ कर पुलिस के पास पहुंच जाए।
दूसरी बात यदि रामसजीवन को आत्हत्या करनी होती तो वह अपने गांव गनेशपुर के पास ही बानगंगा नदी में कूद कर कर लेता, फिर उसे 25 किमी दूर जाकर उसी नदी में जान देने की क्या आवश्यकता थी? इस बारे में थानाध्यक्ष बिंदेश्वरी प्रसाद का कहना है कि मृतक के परिजनों से कोई तहरीर नहीं मिली है। मिलने पर जांच होगी।
दूसरी तरफ क्षेत्र में ऐसी भी चर्चा है कि प्रेम संबंधों के कारण ये कुकृत्य किया गया है, पुलिस जांच करे तो यह मामला हत्या साबित हो सकता है। लेकिन पुलिस तो तहरीर के इंतज़ार में है, और राम सजीवन के परिजन समाजार्थिक तौर पर बेहद कमज़ोर हैं, लोग कहते हैं वे डरे हुए हैं। इसलिए तहरीर नहीं दे रहे हैं और पुलिस है कि बिना तहरीर के टस से मस नही हो रही।





