सपा की सलामती की दुआएं करते सलामत भाई का गम, अब कहां जायें हम ?

January 2, 2017 3:18 PM0 commentsViews: 289
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नजीर मलिक

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सिद्धार्थनगर। समाजवादी पार्टी के दंगल से यदि कोई सर्वाधिक दुखी है, तो वह सलामत भाई हैं। लखनऊ के समाजवादी पार्टी के सामने समाजवादी झंडे की ड्रेस पहने और समाजवादी साइकिल वाला परचम लहराने वाले सलामत भाई पार्टी बंटने और साइकिल निशान जब्त होने की दशा में कैसे रहेंगे, यह सवाल उन्हें बेहद परेशान कर रहा है।

कौन हैं सलामत भाई

45 साल के सलामत खान उर्फ सलामत भाई जौनपुर जिले के सुजानगंज के रहने वाले हैं। वह पिछले पांच सालों में समाजवादी पार्टी के लखनऊ स्थित कार्यालय के इर्द–गिर्द अनोखे अंदाज में पार्टी का प्रचार करते दिख जाते हैं। सुबह 9 बजे से रात 11 बजे तक वह सपा कार्यालय के सामने ही मिलते हैं।

सलामत भाई का सुजानगंज में भरा पूरा परिवार है, लेकिन वह इनसे बेपरवाह होकर केवल पार्टी के प्रचार में लगे रहते है। किसी ने कुछ दे दिया, तो उसी से खाने पीने का इंतजाम हो जाता है। वरना वह निस्वार्थ पार्टी के सेवा में लगे रहते हैं।

क्यों दुखी हैं सलामत भाई

जब से समाजवादी पार्टी पर विभाजन का खतरा खड़ा हुआ है, उनका दुख किसी भी सपा नेता से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। दरअसल सलामत भाई का मानना है कि पार्टी बंटी तो नेता बंट जायेंगे। नया झंडा, नया निशान ले लेंगे, मगर वह किधर रहेंगे। उनकी आस्था सपा में है। वह नेता जी (मुलायम सिंह), अखिलेश यादव में से किसके साथ रहेंगे, यह सवाल उन्हें बेचैन कर रहा है।

सलामत भाई आज कल अपना झंडा लिये सपा कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री आवास और जनेश्वर मिश्रा ट्रस्ट के बीच भाग दौड़ करते रहते हैं। कोई गंभीर नेता देखते ही तुरंत उनसे पार्टी बचाने की अपील करने लगते हैं, मगर यह नेता कुछ भी कर पाने से इंकार करते हैं।

सवाल है कि अगर पार्टी बंटी तो सलामत भाई क्या करेंगे? इस सवाल के जवाब में उनका कहना है कि वह विभाजन नहीं चाहते। अगर ऐसा हुआ तो घर लौट जायेंगे और सपा का लिबास उतार कर खेती बारी शुरू करेंगे। पार्टी में विभाजन देख पाना उनसे न होगा।

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