रीवां के बाद संगलदीप पर राप्ती की नजर, कई घर नदी में विलीन होने के कगार पर

August 28, 2025 6:41 PM0 commentsViews: 225
Share news

 

रीवां, अमरिया और संगलदीप के ग्रामीण वर्षों से भोग रहे कटान की त्रासदी, ज़िम्मेदार खामोश

 

अजीत सिंह

सिद्धार्थनगर। जिले के जोगिया ब्लॉक अंतर्गत राप्ती नदी पर बसे संगलदीप गांव के गरीब किसान पिछले दो दशक से कटान की त्रासदी झेलने को मजबूर हैं, लेकिन प्रशासन को इसकी ज़रा भी चिंता नहीं है। इस बार भी राप्ती नदी गांव को तेजी से काट रही है। कटान से अब तक तीन घर नदी में विलीन हो चुके हैं, फिर भी ड्रेनेज विभाग इस तरफ ध्यान नही दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सुरक्षा के तत्काल प्रबन्ध न किये गए तो नदी समूचे गांव को ही लील जाएगी।

दर असल उजड़ना और बसना संगलदीप गांव की किस्मत बन चुकी है। अभी जुलाई के अंत में राप्ती नदी तीन घरो को निगल गयी केशव पुत्र वितानु, कन्हैया पुत्र वितानू, श्याम सुन्दर पुत्र बितानु यानी एक ही पिता के तीनो बेटों के घर एक साथ उजड़ गए। तीनों के परिवार आज भी इधर उधर भटक रहे है जगदीश गांव की ऊंची जमीन पर पल्ली तानकर जीवन बसर करने को मजबूर है!

राप्ती नदी 8 और परिवार को अपने निशाने पर लें रखी है कब निगल जाएगी यह कहाँ नही जा सकता जिसमे नरपत, सुरजू, ओमप्रकाश, राधेश्याम, रामशरन, स्वामीनाथ, पेशकर, जगदीश जिनका घर नदी मे बिलीन होने के कगार पर है। गिरे हुए घर का प्रशासनिक स्तर से अब तक कोई मुवावजा नही दिया गया पीड़ित परिवार का कहना है कि जिम्मेदार रिपोर्ट लगाने के लिए अच्छी रकम की मांग कर रहे ऐसे गरीब पीड़ित परिवार पहलें से घर गवा चुका है पल्ली तानकर खुले आसमान के नीचे जी रहा फिर कहाँ से दें पाए अधिकारी को सुविधा शुल्क।

इस बारे में रीवां के किताबुल्लाह कहते हैं कि रीवां, अमरिया और संगलदीप दशकों से नदी की विनाश लीला देखते चले आ रहे हैं, मगर पिछले 30 सालों में एक भी ऐसा अफसर नहीं आये जो इन गांवों की तकदीर पलट सके।

Leave a Reply