डुमरियागंज सीटः किधर जा रहा ब्राह्मण मतदाता? अपने पक्ष में मोड़ने के लिए डटे दोनों प्रत्याशी

May 12, 2024 1:44 PM1 commentViews: 1170
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नजीर मलिक

चित्र परिचय— जिले की ब्राह्मण इंटेलीजेंशिया डा. अरविंद शुक्ल, अनूप त्रिपाठी आदि के साथ सपा प्रत्याशी कुशल तिवारी

सिद्धार्थनगर। डुमरियगंज संसदीय सीट पर चुनाव प्रचार अब चरम पर पहुंचने लगा है। सारे राजनैतिक दलों के प्रत्याशी अब अपने अपने जातीय समीकरणों को ठीक करने में जुट गये हैं। यहां सबसे कड़ा संघर्ष ब्राह्मण वोटों को लेकर है। एक तरफ भाजपा ब्राह्मण वोटों को जातिवाद बनाम राष्ट्रवाद का नारा देकर उन्हें सहेजने में पूरी ताकत से लगी हुई है तो दूसरी तरफ सपा उम्मीदवार ब्राह्मण अस्मिता का सवाल उठा कर उन्हें अपने पक्ष में करने के लिए डट गए हैं।

प्राप्त विवारण के अनुसार डुमरियागंज संसदीय सीट से चुनाव लड़ रहे भाजपा उम्मीदवार व मौजूदा सांसद जगदम्बिका पाल और इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार व पूर्व सांसद भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी आपस में कड़ा मुकाबला कर रहे हैं। इसके अलावा बसपा से नदीम मिर्जा तथा आजाद समाज पार्टी से पूर्व विधायक चौधरी अमर सिंह मैदान में हैं। नदीम मिर्जा मुसलमानों में तथा अमर सिंह कुर्मी समाज में बड़ी सेंध मारी करने में सफल हुए तो दोनों क्रमशः सपा के कुशल तिवारी और भाजपा के सांसद जगदम्बिका पाल को क्षति पहुंचा सकते हैं। लेकिन सपा भाजपा के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती क्षेत्र के 13 प्रतिशत ब्राह्मण मतों को अपने पक्ष में करने की है। डुमरियांज का लगभग 3.60 लाख मतदाता बीते कई चुनावों से भाजपा के पक्ष में एक मुश्त वोट डालता रहा है। लेकिन इस बार यहां से पूर्वांचल के प्रतिष्ठित ब्राह्मण नेता स्व. हरिशंकर तिवारी के पुत्र कुशल तिवारी के इडिया गंठबंधन (सपा) से उतर जाने के कारण हालात कुछ बदले नजर आ रहे हैं। ब्राह्मण समाज के एक बड़े वर्ग का रुझान स्पष्ट तौर से उनके साथ भी देखा जा रहा है। यह बात भाजपा के लिए चिंता पैदा करने वाली है।

वर्तमान में कुशल तिवारी समेत पूरा समाजवादी खेमा ब्राह्मण मतों पर एकाधिकार के लिए ब्राह्मण अस्मिता का नारा बुलंद कर रहा है। उनके लोग मैदान में इस समाज की घटती आर्थिक व राजनैतिक ताकत को चुनावी मुद्दा बना रहे हैं। अभी शुक्रवार को स्थानीय गोकुल धाम पर आयोजित परशुराम जयंती समारोह को गाड़ियां हटाने के नाम पर पुलिस ने जिस प्रकार डिस्टर्व किया, उसे सपा खेमा जम कर मुद्दा बना रहा है।इस बारे में पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी ने स्वयं वक्तव्य के माध्यम से ब्राह्णण समाज को संकेत देने का काम किया है। इसका सपा के कुशल तिवारी को लाभ भी मिलता दिख रहा है।

इस बारें में शहर के प्रसिद्ध चिकित्सक डा. अरविंद शुक्ल व कुशल समर्थक राघवेद्र दुबे कहते हैं कि इस प्रकार की हरकत प्रशासन के माध्यम से भाजपा जितना करायेगी, उतना ही लाभ सपा को मिलेगा। जवाब में भाजपा नेता सच्चिदानंद पांडेय कहते हैं कि कुशल तिवारी के लड़ने के बावजूद ब्राहमण समाज भाजपा के साथ ही रहेगा क्योंकि समाज का यह प्रबुद्ध वर्ग जातिवादी नहीं बल्कि राष्ट्रवादी है। इसलिए वह वोट भाजपा को ही देगा। मगर सपा नेता मणेन्द्र मिश्र कहते हैं कि ब्राहमण अस्मिता की बात करने में राष्ट्रवाद कहीं आड़े नहीं आता। वैसे भी राष्ट्रवाद का ठेका भाजपा के पास नहीं है।

कुल मिला कर अतीत में इस समाज का सारा वोट भाजपा को जाता रहा है। परन्तु इस बार ब्राह्मण समाज कुशल तिवारी की तरफ भी आकर्षित है। अब वह उनके साथ कितनी ताकत से है, इसका आंकलन दो चार दिन में हो जाएगा। उसके विभाजन से भाजपा कितनी प्रभावित होती है यह भविष्य में स्पष्ट हो जाएगा यहं मतदान 25 मई को होना है। तब तक वोट बैंक की यह जंग जारी रहेगी।

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