चुनाव में पूर्व सांसद मो. मुकीम कुछ पाया नहीं गंवाया, लाेकसभा में लग सकता है झटका

March 16, 2017 3:28 PM0 commentsViews: 2751
Share news

नजीर मलिक

555

सिद्धार्थनगर। जिले में चुनावों की गर्मी धीरे धीरे उतर रही है। भाजपा जिले की पांचों सीटें जीत कर उत्साह में है, वहीं विपक्ष कार की मथंन में जुटा हुआ है। ऐसे में एक सवाल उठता है कि इटवा के नेता और पूर्व सांसद हाजी मुहम्मद मुकीम ने क्या खोया और क्या पाया? कहीं उनकी रणनीति उन्हीं के लिए नुकसानदेह तो नहीं साबित होगी।

इस चुनाव में सपा कांग्रेस गठबंधन के चलते पूर्व सांसद मुकीम ने सपा के लिए तीन विधानसभा क्षेत्रों में जम कर काम किया। इटवा में अपने कट्टर प्रतिद्धंदी सपा के माता प्रसाद के लिए जम कर प्रचार किया, लेकिन प्रचार में वह यह कहते देखे गये कि अगर बसपा के उम्मीदवार अर्शद खुशीद जीत गये तो उनकी राजनीति का खातमा हो जायेगा। इटवा के समझदार मुस्लिम तबके में इसका गलत संदेश गया है।

इटवा के लोगों का कहना है कि उन्हें माता प्रसाद के लिए वोट मांगना चाहिए था, लेकिन अर्शद को हराने की बात का अच्छा संदेश नहीं गया है। वे लोग सवाल उठाते है कि क्या अर्शद मुसलमान नहीं थे। हम लोगों को माता प्रसाद के सत्ताकाल में मुकीम साहब के नाते बहुत परेशानी झेली है। एेसे में आगे हम मुकीम साहब को सिर्फ मुसलमान होने के नाते वोट क्यों दें।

दूसरी तरफ डुमरियागंज में वह सपा प्रत्यशी चिनकू यादव के प्रचार में लगे तो शोहरतगढ़ में गठबंधन के सपा प्रत्याशी के बजाये कांग्रेस के रिजेक्ट प्रत्याशी के लिए प्रचार में लगे। इसका नतीजा भी अच्छा नही हुआ। मुस्लिम बाहुल्य डुमरियागंज और शोहरतगढ़ के मुसलमानों में इसकी  विपरीत प्रतिक्रिया देखी जा रही है। मुस्लिम समुदाय का मानना है कि इन दोनों क्षेत्रों में उनके कारण मुस्लिम उम्मीदवारों को कुछ नुकसान हुआ।

बहरहाल लोकसभा के चुनाव में अब दो साल रह गये हैं। एक साल बाद चुनावबाज सक्रिय हो जायेंगे। यह तकरीबन तय है कि पूर्व सांसद मुकीम कांग्रेस से लोकसभा सीट के उम्मीदवार होंगे। उनके मुकाबले बसपा से भी कोई मुस्लिम चेहरा ही सामने आयेगा, यह भी करीब करीब तय है। ऐसे में मुसलमानों में बैठी नाराजी उनको कमजोर कर सकती है।

मुकीम साहब की इस रणनीतिक गलती से उनके कई साथी चुनाव के दौरान ही उनसे अलग हो गये और वह इटवा में बसपा तो शोहरतगढ़ में सपा प्रत्याशी के चुनाव प्रचार में लग गये। उनके एक साथी ने कहा कि पूर्व सांसद ने विधानसभा चुनाव में गलत पक्ष के साथ खड़े होकर मुसलमानों में बेहद नाराजी भर दी है।

इस बारे में कपिलवस्तु सीट के मुस्लिम मतदाता और सपा समर्थक अब्दुलबारी का कहना है कि मुकीम साहब न तो कपिलवस्तु में प्रचार के लिए निकले न ही बांसी में। वह सिर्फ इटवा, डुमरियागंज और शोहरतगढ़ सीटों पर ही गये, जहां मुस्लिम लीडर मजबूत हालत में थे। मुसलमान उनकी पोलिसी समझ गया है। वह किसी मुस्लिम लीडर का उभरना बर्दाश्त नहीं कर सकते।ऐसे में आने वाले लोकसभा चुनाव में उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ जाये तो ताज्जुब नहीं।

 

Leave a Reply