डुमरियागंज सीट पर बदल रहे समीकरण: पाल को चुनौती देंगे सपा के विनय शंकर तिवारी?

March 14, 2024 1:24 PM0 commentsViews: 5246
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डुमरियागंज सीट पर तेजी से बन बिगड़ रहे समीकरण, विनय शंकर को लेकर बुधवार को लखनऊ में बुलाये गये थे सिद्धार्थनगर के प्रमुख समाजवादी नेता

नजीर मलिक

चित्र परिचय—- सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी

सिद्धार्थनगर। तमाम वार्ताओं के बाद अब सपा-कांग्रेस गठबंधन के नेताओं के बीच यह तय हो गया है कि डुमरियागंज संसदीय सीट पर समाजवादी पार्टी का ही उम्मीदवार चुनाव लड़ेग।  इसके बाद  यहां सपा की  चुनावी गतवधि तेज हो गई है मगर इसके साथ यहां से भाजपा को शिकस्त देने के लिए नये और सशक्त उम्मीदवार की तलाश  शुरू हो गई है। नये हालात में यहां से चिल्लूपार (गोरखपुर) के पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी को उतारने के लिए सपा मन बना रही है। बता दें कि विनय शंकर तिवारी पूर्वांचल के सबसे प्रभावशाली ब्राह्मण नेता रहे स्व. हरिशंकर तिवारी के पुत्र हैं।

बता दें कि समाजवादी पार्टी के नेताओं द्वारा बुधवार को सिद्धार्थनगर के खास-खास नेताओं को लखनऊ बुला कर उनकी राय ली गई। अभी यह तो पता नहीं चल सका है कि जिले के सपा नेताओं ने प्रदेश आलाकमान के सामने क्या राय व्यक्त की है, परन्तु इतना तो तय है कि समाजवादी पार्टी ने डुमरियागंज सीट से विनय शंकर तिवारी को उतारने के विषय में राय जानने के लिए ही सपाइयों को बुलाया था। अगर उनके नाम पर सहमति बन गई तो यहां का चुनावी परिदृश्य बहुत रोचक व रोमांचक हो जायेगा।

लखनऊ के भरोसेमंद सूत्र बताते हैं

लखनऊ के सपा के सूत्रों ने बताया है कि दरअसल सपा इस सीट पर जिले के नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय का चुनाव में उतारने का मन बना चुकी थी, मगर सपा के ही कुछ वरिष्ठ नेताओं ने माता प्रसाद पांडेय की उम्र के कारण उनकी जगह किसी अन्य ब्राह्मण नेता को उतारने की राय दी। इसी विमर्श के दौरान विनय शंकर तिवारी का नाम चर्चा में आया और इसी संदर्भ में बुधवार को लखनऊ में मीटिंग हुई। हालांकि इसको लेकर कांग्रेस के एक बड़े नेता भी सपा के टिकट के प्रयास में हैं, मगर विनय शंकर तिवारी के नाम पर स्वयं अखिलेश भी राजी बताये जाते हैं। सूत्र कहते हैं स्वयं माता प्रसाद पांडेय भी इसी  विचार से सहमत हैं, मगर माता प्रसाद पांडेय के कथन की पुष्टि अभी नहीं हो पायी है।

डुमरियागंज के जातीय समीकरण

डुमरियागंज संसदीय सीट का जातीय समीकरण् वर्तमान में सपा के लिए बेहद मुफीद है। यहा 26 प्रतिशत मुस्लिम और 10 प्रतिशत यादव मतदाता है। जो सपा के पक्ष में एक जुट हैं। इसमें 5 फीसदी ब्राह्मण मत जोड़ देने से यह संख्या 41 प्रतिशत हो जाती है। इसके अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग से कम से कम 5 फीसदी वोट सपा को मिलते ही हैं। कुछ प्रतिशत कांग्रेस के परम्परागत वोट है, जो गठबंधन के चलते सपा को मिलेंगे ही। ऐसे में सपा का ब्राहृमण प्रत्याशी की ताकत यहां अजेय हो जाती है। बशर्ते वह अपना सजातीय मत खींच कर ला सके। और स्व. हरिशंकर तिवारी जैसे प्रतिष्ठित राजनेता के परिवार का  सदस्य यह आसानी से कर सकता है। इस पर बहुत से लोग सहमत हैं। फिलहाल कल तक सपा क्या निर्णय लेगी, यह देखने की बात होगी।

अब तक कि सियासी उलझनें

डुमरियागंज संसदीय सीट से विपक्ष का टिकट फाइनल न हो पाने के कारण कई सियासी उलझनें रहीं। पहले यह सीट सपा को मिली थी और कांग्रेस को महाराजगंज। बाद में एक समय आया कि महाजगंज को सपा तथा डुमरियागंज सीट को कांग्रेस को देने पर सहमति बनने लगी। यहां से कांग्रेस नेता नर्वदेश्वर शुक्ला का नाम चलने लगा। फिर मायावती की पार्टी बसपा से भी गठबंधन होने की आशा में यहां से किसी दल के टिकट की घोषणा अन्तत: रोक दी गई। मगर उनसे गठबंधन न हो पाने की दशा में यह सीट फाइनल रूप से सपा के खाते में गई है। अब सपा नेतृत्व पर है कि वह यहां से विनय शंकर तिवारी को लड़ाती है अथवा अपने दिग्गज नेता माता प्रसाद पांडेय पर ही भरोसा करती है। बहरहाल अभी भी आचार संहिता लगने यानी 15 मार्च तक इंतजार करना होगा, क्योंकि विपक्ष के खेमे में सियासी समीकरण बड़ी तेजी से बन बिगड़ रहे हैं।

 

 

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