कई नाजुक घटनाओं से बढ़ रही संवेदनशीलता, प्रशासन को रखनी होगी चौकस नजर
फागू शाह बाबा की मजार ध्वस्त करने से लगायत, धर्मांतरण
सम्बंधी कई आरोपों का लाभ उठा सकते हैं साम्प्रदायिक तत्व
नजीर मलिक
सिद्धार्थनगर। नेपाल सीमा से सटे इस जिले में पिछले कुछ दिनों से निरंतर ऐसी घटनाएं जन्म ले रही हैं, जिससे माहौल की संवेदनशीलता बढ़ने लगी है। इनमें राजनैतिक दलों के भी हस्तक्षेप का भी कुछ न कुछ हाथ बताया जाता है। लिहाजा पुलिस प्रशासन पर जिम्मेदारी आन पड़ी है कि वह जिले के हर खित्ते पर अपनी पैनी नजर रखे तताकि कहीं किसी अप्रिय घटना की आशंका होते ही वह त्वरित कार्रवाई कर सके। अन्यथा समाज विरोधी आवांछनीय तत्व इसका लाभ लेने का प्रयास कर सकते हैं।
पिछले महीने डुमरियागंज के ग्राम चौखड़ा में प्रशासन द्धारा फागू शाह बाबा की मजार ध्वस्त होने पर जहां समाजवादा पार्टी के नेताओं ने इसे अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करार दिया तो उसके प्रमुख विरोधी दल के कार्यकर्ताओं ने सार्वजानिक तौर पर खुशियां मनाईं और अपनी खुशी का सोशल मीडिया पर इजहार किया। अभी यह मामला ठंडा पड़ ही रहा था कि गत २२ जुलाई को जनपद के अल फारूक के प्रबंधक मौलाना शब्बीर अहमद को इटवा पुलिस ने धर्मांतरण कराने के प्रयास की एक शिकायत पर गिरफतार कर लिया। इस पर आम प्रतिक्रिया यह है कि यह मामला नितांत फरजी है। आरोप लगाने वाले व्यक्ति के पास इस आशय के कोई प्रमाण नहीं हैं तथा पुलिस रिकार्ड के मुताबिक आरोपी अखंड सिहं की छवि खुद भी संदिग्ध है।
इसी प्रकार २५ जुलाई को खबर मिली की कि जिला मुख्यालय निवासी बीरेन्द्र द्धारा यहा जिले के एक और मुस्लिम गलर्स स्कूल के प्रबंधक मनव्वर हुसैन पर धर्मांतरण के प्रयास का आरो लगाते हुए सदर थाने में प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन पुलिस ने इस बार गिरफ्तारी न कर मामले की जांच में लग गई। इधर प्रबंधक अपनी गिरफ्तारी के डर से फरार हैं। गौर करने की बात यह है कि जिस प्रकार का आरोप अखंड सिंह ने मौलाना शब्बीर पर लगाया है, ठीक उसी प्रकार का आरोप बीरेन्द्र ने मनव्वर हुसैन पर लगाया है। वही चपरासी का नौकरी देने, कतर भेजने और लाखो रुपये देने का लालच आदि आदि।
इसी प्रकार २६ जुलाई को भवानीगंज थाने के केवटली गांव में इसाई धर्म कि प्रार्थना सभा करने पर पुसि ने राम सगर चौधरी नामक व्यक्ति को अरेस्ट कर लिया। आरोप है कि वहां गरीब लोगों को इसाई बनाने का षडयंत्र किया जा रहा था। इस मामले में हिंदू युवा वाहिनी के एक मुकामी नेता ने सक्रियता दिखाई। जबकि प्रार्थना सभा में आईं महिलाओं ने आन कैमरा बताया कि वे स्वेच्छा से उक्त सभा में गई थी।
बहरहाल इन घटनाओं का सच क्या है, क्या वास्तव में यह सब कृत्य धर्म परिवर्तन के प्रयास थे अथवा इसके पीछे कुछ लांगों का और ही स्वार्थ है, इसका पता तो पुलिस की जांच से ही पता चलेगा। लेकिन खतरा इस बात का है कि इन सब घटनाओं केबाद जिले में संवेदनशीलता बढ़ गई है। इससे स्वार्थी तत्वों द्धारा साम्प्रदायिकता को हवा देना आसान लगने लगा है। इस लिए जिला और पुलिस प्रशासन को इस पर ध्यान देने की जरूरत है।





