अल फारूक के शब्बीर अहमद की गिरफ्तारी का मामला धर्म परिवर्तन अथवा ब्लैक मेलिंग ?

July 25, 2025 12:19 PM0 commentsViews: 576
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पुलिस रिपोर्ट से लगता है कि अखंड सिंह की छवि पहले धूमिल, बाप के अनुसार बेटा अपराधी व एयाश

अल फारूक इंटर कालेज के प्रबंधक शब्बीर अहमद मदनी की गिरफ्तारी का प्रकरण, पुलिस जांच में जुटी

ओजैर खान

अल फारूक इंटर कालेज के प्रबंधक शब्बीर अहमद मदनी

सिद्धार्थनगर। तहसील मुख्यालय इटवा स्थित अल फारूक इंटर कॉलेज के प्रबंधक शब्बीर अहमद की कथित धर्मांतरण के आरोप में जेल जाने के बाद प्रकरण में नये तथ्यों का खुलासा हो रहा है। इस प्रकरण में शिकायतकर्ता की संदिग्ध पृष्ठभूमि और प्रबंधक शब्बीर द्वारा लगाए गए ब्लैकमेलिंग के आरोपों पलिस की पूर्व की एक जांच रिपोर्ट ने और भी बल दे दिया है।  पुलिस अब इस प्रकरण की जांच में गंभीरता से जुट गई है।

इटवा थाने के शाहपुर निवासी अखंड प्रताप सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में कहा है वर्ष 2020 में बेरोजगारी के दौरान वह अल फारूक इंटर कॉलेज में बाबू की नौकरी के लिए गया था। उनका दावा है कि वहीं उन्हें धर्म परिवर्तन का लालच दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि एफिडेविट के माध्यम से उनका नाम बदलकर “इमरान खान” कर दिया गया था, पुलिस ने अखंड प्रताप की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रबंधक शब्बीर अहमद को गत बुधवार गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी से पहले, प्रबंधक शब्बीर अहमद ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया था कि अखंड प्रताप उनके कॉलेज में कभी नौकरी के लिए आए ही नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग उन्हें पैसे के लिए ब्लैकमेल कर रहे थे।

सीओ इटवा की वह रिपोर्ट जिसे पढ़ कर अखंड सिंह के बारे में बहुत कुछ जाना जा सकता है।

इधर जब प्रकरण गर्म हुआ तो अखंड प्रताप सिह के बारे में कुछ चौकाने वाले त्थ्य आये।  18.5.2020 को जारी इटवा के तत्कालीन सीओ श्रीयश त्रिपाठी की जांच रिपोर्ट भी सामने आयी, जिसमें सीओ ने अखंड सिंह की छवि खराब होने की पुष्टि की थी। यह जाच अखंड के पिता की तहरीर पर हुई थी, जिसमें पिता उमेश सिहं ने माना है उनका बेटा शराबी और ऐयाश है। वह अपने को इमरान बताता है। वह घर की सम्पत्ति बेचने के लिए आये दिन विवाद करता है। इसलिए उसे सम्पत्ति से भी बेदखल कर दिया है। अखंड सिंह के पिता की इस शिकायत को सीओ ने सही माना है।

सीओ की रिपोर्ट से प्रतीत होता है कि अखंड ने धर्म परिवर्तन जैसा कुछ किया था, भले ही वह ड्रामा हो या सच हो। यह बात उसके परिजन जानते थे। इसी आधार पर उसे सम्पत्ति से बेदखल भी किया गया। लेकिन उसने धर्म परिवर्तन कहां किया, या किया भी अथवा नहीं,  यह किसी को नहीं मालूम।

बहरहाल इस घटना के पांच साल बाद अखंड सिंह ने शिकायत किया कि वर्ष 2020 उसका धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास किया गया। अब सवाल है कि यदि उनका धर्म परिवर्तन हुआ, या कराने का प्रयास किया गया तो पांच साल खामोश कयों रहे? अब उन्हें इसकी याद कैसे और क्यों आई? यह वे बिंदु हैं जिसकी जांच बेहद जरूरी है।

कालेज के गैरमुस्लिम स्टाफ क्या बोले?

अल फारूक इंटर कॉलेज के हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के शिक्षकों ने अखंड प्रताप के आरोपों को पूर्णतः निराधार बताया है।  शिक्षक राकेश चंद्र श्रीवास्तव, जो 1997 से यहां पढ़ा रहे हैं, ने प्रबंधकि शब्बीर अहमद  को “सुख-दुख का साथी” बताते हुए आरोपों को झूठा करार दिया। लेक्चरर इंद्र प्रकाश चौधरी ने भी आरोपों को मनगढ़ंत बताया और कहा कि उन्हें अपनी योग्यता के आधार पर नौकरी मिली है और 15 महीने की सेवा में कभी किसी ने उन्हें धर्मांतरण के लिए कोई लालच नहीं दिया। शिक्षिका सतवंत कौर  का भी ऐसा ही मानना है।

इस प्रकार परिस्थितिजन्य साक्ष्य को देखें तो अखंड प्रताप के आरोप स्वतः कमजोर दिखते है। लेकिन वास्तविकता क्या है यह तो पुलिस की सघन जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। इस संवेदनशील मामले में कोई भी पुलिस अधिकारी फिलहाल बयान देने के बच रहा है।

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