कथा: श्रीराम विवाह प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
अजीत सिंह
सिद्धार्थनगर। जनपद मुख्यालय के विवेकानंद नगर वार्ड (भीमापार) में आयोजित श्रीविष्णु महायज्ञ एवं संगीतमयी श्रीराम कथा में भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है। कथा के दौरान अयोध्या धाम से पधारे कथा व्यास दयालु दास जी महाराज ने धनुष भंग, श्रीराम विवाह तथा भगवान शिव के विवाह और बारात का प्रसंग बड़े ही रोचक, भावपूर्ण एवं संगीतमय अंदाज में प्रस्तुत किया। कथा के दौरान भगवान श्रीराम के विवाह प्रसंग का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे।
कथा व्यास ने भगवान शिव के विवाह और उनकी अनोखी बारात का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान शिव का विवाह प्रसंग त्याग, समर्पण और भक्ति का अद्भुत उदाहरण है। वहीं श्रीराम के धनुष भंग और विवाह प्रसंग के माध्यम से उन्होंने मर्यादा, विनम्रता और धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन प्रत्येक व्यक्ति के लिए आदर्श है। उनके चरित्र से हमें माता-पिता, गुरु और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की प्रेरणा मिलती है।
कथा के दौरान दयालु दास जी महाराज ने रावण के चरित्र का उल्लेख करते हुए कहा कि रावण अत्यंत विद्वान और शक्तिशाली होने के बावजूद अपनी गलत प्रवृत्तियों और अहंकार के कारण पराजित हुआ। उसने माता-पिता और गुरु के प्रति सम्मान एवं सेवा भाव का पालन नहीं किया, बल्कि संतों से अनुचित कार्य कराए। इसी कारण उसका पतन हुआ।
उन्होंने कहा कि केवल ज्ञान और शक्ति से व्यक्ति महान नहीं बनता, बल्कि उसके आचरण और संस्कार ही उसकी वास्तविक पहचान होते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में माता का स्थान सर्वोच्च माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है- ‘मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव।’ अर्थात माता, पिता और गुरु को देवतुल्य मानकर उनका सम्मान करना चाहिए। जीवन में सबसे पहले मां का स्थान है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने माता-पिता की सेवा करनी चाहिए और कभी भी उनका अपमान नहीं करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिस घर में माता-पिता का सम्मान होता है, वहां सुख, शांति और संस्कारों का वास होता है। आज के समय में युवाओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा माता-पिता एवं गुरुजनों की सेवा को अपना परम कर्तव्य मानने की आवश्यकता है। श्रीविष्णु महायज्ञ एवं संगीतमयी श्रीराम कथा में पहुंचे सदर विधायक श्यामधनी राही सहित अन्य विशिष्टजनों का मुख्य यजमान हरीश चंद्र पाण्डेय ने स्वागत किया। कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर कथा श्रवण कर रहे हैं और धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं। पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।





