श्रीमद्भागवत कथा में गूंजा शुकदेव जन्म और परीक्षित को श्राप का प्रसंग
भीमापार स्थित श्रीराधा कृष्ण मंदिर में श्रद्धालुओं ने सुनी भावपूर्ण कथा
कथा व्यास ने बताया, भागवत श्रवण से मिलता है जीवन को सही मार्ग
अजीत सिंह
सिद्धार्थनगर। नगर क्षेत्र के भीमापार स्थित राधा कृष्ण मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा रसोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से वातावरण सराबोर रहा। कथा व्यास हितांशु (राधावल्लभ नागाजी) ने श्रद्धालुओं को शुकदेव जी के जन्म, राजा परीक्षित के जन्म तथा परीक्षित जी को श्राप मिलने के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
कथा व्यास ने बताया कि श्रीमद्भागवत केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, धर्म और कर्तव्य का मार्ग दिखाने वाला दिव्य ज्ञान है। उन्होंने शुकदेव जी के जन्म प्रसंग को विस्तार से बताते हुए कहा कि वैराग्य, ज्ञान और भक्ति का समन्वय ही जीवन को सार्थक बनाता है। वहीं राजा परीक्षित के जन्म और उनके द्वारा ऋषि के अपमान के कारण मिले श्राप की कथा के माध्यम से उन्होंने अहंकार और असावधानी के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला।
कथा के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति गीतों और हरिनाम संकीर्तन से माहौल भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालु कथा श्रवण में तल्लीन होकर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति करते रहे। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की अच्छी उपस्थिति रही।
इस अवसर पर राजेश मणि त्रिपाठी, प्रेम पांडेय, परमेश त्रिपाठी, कृष्ण मोहन त्रिपाठी, रंजनेश धर दुबे, जटाशंकर पांडेय, ओपी मिश्र, दिनेश त्रिपाठी, दिनेश मिश्रा, गणेश तिवारी, सुभाष तिवारी, विनय श्रीवास्तव, मदन त्रिपाठी, राजकुमार शर्मा, बलदाऊ शर्मा, प्रदीप श्रीवास्तव, संजय दुबे, अजय मिश्र और राम चंद्र यादव सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।





