श्रीराम कथा: भगवान के वनगमन प्रसंग ने नम कीं आंखें, भक्ति रस में डूबे श्रद्धालु, विधायक भी रहे मौजूद

March 25, 2026 10:15 PM0 commentsViews: 91
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अजीत सिंह 

सिद्धार्थनगर। शहर के अवेद्यनाथ सभागार में चल रहे श्रीराम कथा महोत्सव के छठवें दिन बुधवार को श्रीराम के वनगमन प्रसंग का अत्यंत मार्मिक और हृदयस्पर्शी वर्णन किया गया। कथा वाचक संत गौरव कृष्ण शास्त्री ने अपनी ओजस्वी और भावपूर्ण वाणी से उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। उन्होंने कहा कि श्रीराम का वनगमन केवल एक ऐतिहासिक प्रसंग नहीं, बल्कि त्याग, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा का अद्वितीय उदाहरण है। कथा में सदर विधायक श्यामधनी राही ने पूर्व भेजो जिलाध्यक्ष कन्हैया पासवान के साथ कुछ विशिष्ठ लोगों को अंगवस्त्र और श्रीरामचरितमानस देकर सम्मानित किया। नपाध्यक्ष गोविंद माधव की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

कथा वाचक श्री शास्त्री ने बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीराम ने पिता के वचन की मर्यादा बनाए रखने के लिए राजपाट, सुख-सुविधाओं और वैभव को त्याग कर वनवास को स्वीकार किया। यह प्रसंग आज भी समाज को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने माता सीता और लक्ष्मण के साथ श्रीराम के वनगमन की भावनात्मक झलकियों को इतने जीवंत रूप में प्रस्तुत किया कि श्रद्धालु भावुक हो उठे। जैसे ही अयोध्या त्याग का प्रसंग आया, सभागार में सन्नाटा छा गया और कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। पूरा वातावरण जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।

कथा वाचक ने अपने प्रवचन में वर्तमान समाज को संबोधित करते हुए कहा कि यदि व्यक्ति श्रीराम के आदर्शों सत्य, त्याग और कर्तव्यपरायणता को अपने जीवन में अपनाए, तो समाज में नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना संभव है। उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से आग्रह किया कि वे भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़कर अपने जीवन को सार्थक बनाएं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं एवं युवा मौजूद रहे। कथा के समापन पर भगवान श्रीराम की आरती उतारी गई, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

आयोजकों ने बताया कि महोत्सव के आगामी दिनों में भी श्रीराम कथा के विभिन्न प्रेरणादायक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। इस मौके पर  शिवदत्त अग्रहरि, नीरज श्रीवास्तव, शुभम श्रीवास्तव, संदीप जायसवाल, राघवेंद्र यादव, रमेश गुप्त, महेश्वर अग्रहरि, अजय कसौंधन, रजनीश उपाध्याय, सुनील त्रिपाठी, राकेश त्रिपाठी, अनिल वर्मा, सुनील श्रीवास्तव, श्रीश श्रीवास्तव, पंकज पासवान, देव अग्रहरि, साधना श्रीरवास्तव, डॉ. सीमा मिश्रा, मनोरमा पांडेय, सुधा त्रिपाठी, आशा उपाध्याय, श्रीमती सोनू कसौंधन आदि की मौजूद रहीं।

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