नेपाल में पहाड़ी इलाकों की नाकेबंदी, जरूरी सामानों की सप्लाई रोक रहे मधेसी, काठमांडू में पेट्रोल संकट गहराया

September 27, 2015 8:31 am2 commentsViews: 985
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नजीर मलिक

कपिलवस्तु में मुख्य गेट के सामने धरना देते मधेसी आंदोलनकारी

कपिलवस्तु में मुख्य गेट के सामने धरना देते मधेसी आंदोलनकारी

संविधान संशोधन की मांग को लेकर मधेसियों ने नेपाल के पहाड़ी इलाकों की नाकेबंदी की घोषणा कर दी है। मधेसी संगठन जगह-जगह धरना प्रदर्शन कर लोगों को नाकेबंदी में भाग लेने की सलाह दे रहे हैं। इसके चलते पहांड़ों पर जाने वाले खादृय पदार्थों व अन्य जरूरी जिंसों का अभाव हो गया है। काठमांडू में सिर्फ एक सप्ताह के लिए पेट्रोल का भंडार बचा है।

मधेसियों की हड़ताल के 51 वें दिन सोमवार को तराई के इलाकों में मधेसी संयुक्त मोर्चा व अन्य संगठनों द्धारा नाकेबंदी का एलान कर दिया गया है। इसके तहत भारत से होकर कोई भी सामान नेपाल के उत्तरी दलाके में नहीं जाने दिया जा रहा है।

नेपाल को नमक सब्जी से लेकर पेट्रो पदार्थ आदि सभी कुछ भारत के सोनौली, बढ़नी, रुपईडीहा बीरगंज आदि बार्डर से भेजा जाता है। मगर अब मधेसी संगठन इन बार्डरों पर नजर रख रहे हैं। वह कोई भी ट्रक नेपाल के अंदरूनी हिस्से में नहीं जाने दे रहे है। इसके चलते नेपाल के काठमाडू, पोखरा, मुगलिंग, स्यागंजा, साल्यान आदि पहाड़ी इलाकों में कोई भी सामान नहीं पहुंच पा रहा है।

बताया जाता है कि राजधानी काठमांडू व पोखरा जैसे अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थलों पर जरूरी जिंसों की भारी कमी हो गई है। सर्वाधिक संकट डीजल व पेट्रोल का है। नेपाल के वरिष्ठ अधिकारी के.पी. थापा के मुताबिक काठमांडू में र्सिफ एक सप्ताह के लिए पेट्रोल बचा है।

खबर है भारत में नेपाल के राजदूत दीप कुमार उपाध्याय समस्या के हल के लिए काठमांडू पहंच गये हैं। कल उन्होंने मधेसी बहुल क्षेत्र तौलिहवा का दौरा किया, लेकिन मधेसी अपने फैसले पर अटल है। मधेसी संयुक्त मोर्चा के नेता सहसराम यादव का कहना है कि नेपाल के नीति निर्माताओं को सबक सिखाने का यही एक तरीका बचा है।

खबर लिखने तक नोकेबंदी को लेकर समूचे तराई बेल्ट में बार्डरों पर धरना और ग्रामीण इलाकों में जनजागरण जारी है। शनिवार को कपिलवस्तु में धरना हुआ तो शुक्रवार को रजत प्रताप शाह के नेतुत्व में बहादुरगंज इलाके में साइकिल यात्रा निकली।

नेपाल में मधेसियों की यह नाकेबंदी भविष्य में क्या गुल खिलाएगी, यह देखना शेष है। फिलहाल तो नेपाल खादृय संकट के मुहाने पर है।

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