सियासी जीवन की सबसे कठिन लड़ाई में फंसे यूपी विधानसभा अध्यक्ष

February 23, 2017 3:08 PM0 commentsViews: 1964
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नजीर मलिक

itwa

उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय अपने सियासी जीवन की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं। इस बार वे तिकोनी लड़ाई में मुश्किलों में घिरे हैं। उनकी उम्मीद अब अखिलेश यादव पर टिकी हैं, जो प्रचार के अंतिम दिन इटवा आ रहे हैं। सपाइयों को उम्मीद है कि शनिवार को चुनावी माहौल जरूर बदलेगा।

इटवा की सियासी फिजां इस बार बदली हुई लगती है। सपा कांग्रेस गठबंधन क बाद विधानसभा अध्यक्ष के सबसे सबल प्रतिद्धंदी पूर्व सांसद मो. मुकीम उनके साथ हो गये हैं। इस लिहाज से कागज पर यह गठबंधन अपराजेय लगता है। लेकिन बदले हालात में चुनावी समीकरण भी बदला हुआ है।

सतीश द्धिवेदी हैं पहली चुनौती

दरअसल माता प्रसाद के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती भाजपा उम्मीदवार सतीश द्धिवेदी से मिल रही है। ब्राहमण कैंडीडेट होने के कारण वह सजातीय वोटों में सेंधमारी कर रहे हैं। इसका सीधा नुकसान माता प्रसाद को हो सकता है। सतीश द्धिवेदी सुशिक्षित और कुशल वक्ता भी हैं, उनके भाषणों का प्रभाव भी देखा जा रहा है। अगर माता प्रसाद के ब्रहमण समर्थकों का टूटना जारी रहा तो भाजपा के सतीश द्धिवेदी यहां इतिहास रच सकते हैं।

माता प्रसाद पांडेय इस क्षति की भरपाई कांग्रेस नेता मुकीम के समर्थक वोटों से भी कर सकते थे, लेकिन सवाल यह है कि क्या मुकीम का समर्थक वर्ग उनके पक्ष में मतदान करेगा? इस बारे में एक नौजवान हमीदुल्लाह का कहना है कि हम मुकीम साहब के बंधुआ नहीं है। हमने उन्हें वोट दिया, उनके कहने से उन माता प्रसाद को वोट कैसे देंगे, जिनके जुल्म हम सहते रहे हैं।

कैसे दें दें मुकीम के कहने पर वोट

मझौवा चौराहे पर नबीरहम बाजार के दिन चाय की दुकान पर कहते देखे गये कि कि मुकीम साहब यह कहते घूम रहे हैं कि अगर अरशद (बसपा प्रत्याशी) जीत गये तो मेरा राजनीतिक कैरियर समाप्त हो जायेगा। नबीरहम सवाल करते हैं, कि मुकीम साहब चुनावों में अपना भाई कह कर वोट हम मुसलमानों से वोट लेते हैं तो क्या अरशद खुर्शीद भाई नहीं हैं। उनका विरोध क्यों कर रहे मुकीम साहब? हम उनकी बात मान कर सपा को वोट क्यों दें। इटवा के मुसलमानों को सपा सरकार में बहुत सताया गया है। अब मुकीमसाहब की राजनीति खतम समझो।

तीन के बीच लड़ाई कांटे की

फिलहाल इटवा में लड़ाई कांटे की है। तीनों प्रत्याशी एक एक वोट के लिए जूझ रहे हैं। स्पीकर साहब और उनके गठबंधन के साथी मो. मुकीम की क्षेत्र में कड़ी मुखालफत हो रही है। इस कारण माता प्रसाद पांडेय थोड़े कमजोर दिख रहे हैं। फिर भी सतीश द्धिवेदी, अरशद खुर्शीद  और माता प्रसाद के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। ऐसे में माता प्रसाद के खेमे को शनिवार को इटवा में अखिलेश की रैली का बेसब्री से इंतजार है।सपाइयों को उम्मीद है कि प्रचार के अंतिम दिन मुख्यमंत्री के आने के से चुनावी माहौल सपा के पक्ष में बन जाएगा।

 

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