Exclusive- डुमरियागंज से कांग्रेस का टिकट क्यों नहीं हो पा रहा फाइनल

April 4, 2019 11:43 am0 commentsViews: 2660
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नजीर मलिक

“यूपी के डुमरियागंज संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस का टिकट फाइनल होने मै देर हो सकती है। कांग्रेस मानती है कि पूर्व सांसद मो मुकीम  यहां से मजबूत प्रत्याशी हैं, मगर गठबंधन से मुस्लिम प्रत्याशी होने से सीट हार सकती है। जबकि कांग्रेस पार्टी भविष्य के मद्देनजर रणनीति के तहत गठबन्धन के बजाए बीजेपी को हराने में यकीन रखती है। कांग्रेस मान रही है कि विशेष हालत में सरकार बनाने के लिए गठबंधन से मदद लेनी पड़ सकती है। इसलिए वह नये सिंरे से टिकट को लेकर मंथन कर रही है।”

सवर्ण को टिकट देने को मन बना रही कांग्रेस

यही सोच के कारण कांग्रेस पार्टी मोहम्मद मुकीम के बजाए किसी सवर्ण को टिकेट देने के विचार पर भी गौर रही रही है।   कांग्रेस का मानना है कि मुस्लिम चेहरे को टिकट देने पर भी  कांग्रेस की हार होगी,  ऐसी हालत में अगर उसकी हार के साथ बीजेपी भी हार जाए तो प्रधान मंत्री की रेस में गठबन्धन उम्मीदवार से समर्थन की उम्मीद तो की ही जा सकती है। भले ही मायावती गठबंधन से पीएम पद की दावेदारी करें, मगर विपरीत हालत में सपा बसपा को कांग्रेस को समर्थन देना पड़ सकता है।

मुकीम को क्यों नजर अंदाज कर रही कांग्रेस

बताया जा रहा है कि पूर्व सांसद मुकीम कांग्रेस की पहली पसंद हैं, मगर मौजूदा राजनीति में गठबन्धन के मुकाबले बीजेपी को हराना कांग्रेस की प्राथमिकता है। इसीलिए कांग्रेस ने मुकीम को नज़रंदाज़ कर किसी ब्राह्मण कैंडीडीडेट को उतारने का मन बना लिया है। सूत्रों का कहना है कि ब्राह्मण कैंडिडेट ही बीजेपी को हरा सकता है। अगर वह न भी जीता तो भाजपा तो हार ही जायेगी।

बताया जा रहा है पूर्व सांसद मुकीम के  विकल्प में कांग्रेस के पास तीन ब्राह्मण नाम हैं। जिनमे एक कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक ईश्वर चन्द शुक्ला भी हैं, जिन्हे प्रियंका गांधी खारिज कर सकती हैं। इसके अलावा बीजेपी के टिकेट के दो दावेदार चेहरे भी अब कांग्रेस की लाइन में खड़े हो गए हैं।

गंभीर दावेदार बन कर उभरे कांग्रेस नेता नर्वदेश्वर शुक्ल

सूत्र बताते हैं कि अचानक पुराने मगर धाकड़ कांग्रेसी नेता नर्वदेश्वर शुक्ला का नाम भी कांग्रेस हाईकमान को सुझाया गया  है। कांग्रेस हाई कमान ने नर्वदेश्वर शुक्ला की प्रोफ़ाइल चेक की है। नर्वदेश्वर शुक्ला एक बार इटवा और दो बार बांसी से विधायक का चुनाव लड़ चुके हैं और वे विजेता को अच्छी टक्कर देने में कामयाब रहे हैं।वे ग्रमीण विद्युतीकरण के चेयरमैन के रूप में  दर्जा प्राप्त मंत्री भी रहे हैं। यही नहीं वह आर्थिक रूप से मजबूत भी हैं। ऐसे में वह अच्छी टक्कर देने में समर्थ हो सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि अब वह पार्टी की नजर में एक गंभीर दावेदार बन कर उभरे हैं।

अंतिम विकल्प पूर्व सांसद मुकीम तो हैं ही

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस आलाकमान आला कमान यह समझता है कि भाजपा खेमे से आये दो दावेदारों में से एक राजनीतिक रूप से कमजोर हो चुके हैं। दूसरे युवा हैं अनके पास आर्थिक संसाधन भी हैं, मगर उनका राजनीति से कुछ महीनों का ही वास्ता है। अतएव वे ज्यादा प्रभाव नही डाल सकेंगे। सूत्र ये भी बताते हैं कि यदि कोई पुराना कांग्रेसी उम्मीदवार बनने योग्य न मिला तो दोनों भाजपा नेताओं में से कोई एक कैंडेट बन सकता है। यदि हालात किसवर्ण के पक्ष में न बनेतो अंतिम विकल्प के रूप में पूर्व सांसद मोहम्मद मुकीम तो हैं ही।

 

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस आलाकमान आला कमान यह समझता है कि भाजपा खेमे से आये दो दावेदारों में से एक राजनीतिक रूप से कमजोर हो चुके हैं। दूसरे युवा हैं अनके पास आर्थिक संसाधन भी हैं, मगर उनका राजनीति से कुछ महीनों का ही वास्ता है। अतएव वे ज्यादा प्रभाव नही डाल सकेंगे। सूत्र ये भी बताते हैं कि यदि कोई पुराना कांग्रेसी उम्मीदवार बनने योग्य न मिला तो दोनों भाजपा नेताओं में से कोई एक कैंडेट बन सकता है। यदि हालात किसवर्ण के पक्ष में न बनेतो अंतिम विकल्प के रूप में पूर्व सांसद मोहम्मद मुकीम तो हैं ही।

 

 

 

 

 

 

 

 

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