सैलाबः बीस जान गई, दो हजार करोड़ का नुकसान, अब भी सैकड़ों गांव राहत के इंतजार में

August 27, 2017 2:09 pm0 commentsViews: 250
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–––  600 कराड़ की फसल तबाह, 200 करोड़ के मकान बरबाद, 250 करोड के सड़क, पुल व तटबंध पानी में बहे

नजीर मलिक

उसका बाज़ार पुल के आस रोड के किनारे शरण लिए ग्रामीण

सिद्धार्थनगर।जिले में 12 अगस्त को शुरू हुई बाढ़ का कहर अब तक जारी है। पिछले बारह दिनों में सैलाब से 20 लोगों की मौत हो चुकी है। लगभग दो हजार करोड़ की सम्पत्ति के नुकसान का अनुमान है। इतने पर भी प्रशासन की आंख नही खुल रही। आज भी पचासों गांव राहत के इंतजार में हैं। अब लेखपालों की लूट शुरू हो चुकी है।

फसलों का नुकसान सर्वाधिक

जिले में सर्वाधिक नुकासान फसलों का हुआ है। प्रशासन के मुताबिक कुल 60 हजार हेक्टेयर फसल बाढ़ में डूबी हैं। आम तौर पर एक हेक्टेयर में लगभग 80 हजार रुपये का धान का उत्पादन होता है।इस लिहाज से लगभग पांच सौ करोड़ की फसल बरबाद हुई। मगर इसमें धान के अलावा अन्य महंगी फसलों और सब्जियों के मुल्य जोडा जाये तो यह ाकम लगभग 6 सौ करोड़ हो जाती है।  इसके अलावा दो हजार मकानों का बरबादी में भी 200 करोड़ का नुकसान हुआ है। कुल मिला कर इस सैलाब में किसानों को 800 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है।

20 मौत भी किसान परिवार से हुई

इसके अलावा जिले में अब तक 20 लागों की मौत बाढ से हो चुकी है। पहली मौत 16 अगस्त को एक बच्चे की हुई थी। तब से गत शनिवार को हुई 2 मौतों तक यह तादाद 20 हो गई है। यह सारी मातें किसान परिवार के घरहिुईं। जाहिर है मौत के भयनक तांडव का दर्द भी गरीब किसानों को भी भोगना पड़ा है। उन मौतों से उठने वाले क्रंदन से जिला लगातार बारह दिन तक सदमें में रहा।

ग्रामीणों को बचाते एनडरआरएफ के जवान

सरकारी सम्पत्ति का नुकसान

सैलाब से हुई सरकारी सम्पत्ति के नुकासान का अभी आंकलन चल रहा है। प्रशासन को अभी तक सड़क, पुल और बांध के टूटने से हुए नुकसान का आंदाजा लग पाया है। अभी तक मुख्य मार्गों और बांधों की क्षति का आंकलन 250 करोड़ किया गया है। लेकिन बाढ पूरी तरह उतरने के बाद जअ ग्रामीण पुलियों और सड़कों के टूटनेसे हुई क्षति का आंकलन होगा तो यह क्षति 500 करोड़ तक पहुंच जाएगी।

इस प्रकार अभी तक कुल प्रत्यक्ष क्षति 13  सौ करोड होने की बात सामने आयी है। अप्रत्यक्ष क्षति को जोड़ने पर इसके 2 हजार करोड तक पहुंचने का अनुमान है। जानकरों का मानना है कि  वास्तविक क्षति इससे ज्यादा भी हो सकती है। क्योंकि प्रशासन आम तौर पर सैलाब में किसानों की क्षति को कम करके आंकता है।

राहत कार्य अब भी धीमा

बाढ़ अब उतार पर है। नदियां तेजी से घट रही हैं। तगर २०० गांव अब भी परनी से घिरे हैं। वहां अभी तक कोई राहत नहीं पहुंचाई जा सकी है। प्रशासन द्धारा बंटने वाली राहत सामग्री में अब लेखपाल अपना हिस्सा बना रहे हैं। बिना पैसे के पीड़ित का नाम राहत सूची में नहीं डाला जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि राहत वितरण तेज है। मगर प्रशासन को चाहिए कि वह राप्ती और बूढ़ी राप्ती के दोआबे के गांवों को देखे तो पता चलेगा कि उसके दावे की असलियत क्या है।

 

 

 

 

 

 

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