लखनापार बांध धंसा व मदरहवा तटबंध टूटा, तबाही बढ़ी, गांव छोड़ कर भाग रहे लोग, रेल सेवा भी ठप

August 18, 2017 3:09 pm0 commentsViews: 3216
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––– दस बजे खजूरडांड के पास धंसा लखनापार बांध, 11 बजे मदरहवा तटबंध भी टूट गया, हर तरफ हाहाकार

नजीर मलिक

सिद्धार्थनगर। शुक्रवार को सदर तहसील में एक तटबंध धंस जाने व बांसी  इलाके में  तटबंध टूट  जाने  से सैलाब ने करीब सौ और गांवों में तबाही मचा दी है।  दोनों तटबंध के किनारे रहने वाले गांवों में भगदड़ मच गई है। लोग गांव छोड़ कर भाग रहे हैं। ही तरफ चीख पुकार मची हुई है। कोई किसी को बवाने वाला नहीं है। उधर गोखपुर के निकट रेल पटरी पर पानी आने जाने से गोरखपुर–गोंडा वाया बलरामपुर रेल सेवा भी ठप हो गई है। इस तरह जिले में अब तक चार तटबंध टूट चुके हैं।

 

मदरहवा बांध सतवाढ़ी के पास टूटा

जानकारी मिली है कि बांसी क्षे़त्र में ग्राम सतवाढ़ी के पास अशोगवा–मदरहवा बांध टूट गया। बांध टूटने की घटना शुक्रवार 11 बजे के आस पास हुई। इससे पानी सतवाढ़ी गांव में घुसने लगा। चश्मदीदों के मुताबिक बांध टूटते ही गांव के लोग अपना सामान समेट की भागने लगे। इससे अशोगवा, असिधवा सतवाढ़ी आदिदर्जनों गांवों में पानी घस रहा है। नदी कर वेग ज्यादा होने से कम से कम पचास  गांव घिरने की आशंका व्यक्त की जा रही है। गांवों में चीख पुकार मची हुई  है। लोग मदद के लिए गुहार कर रहे हैं। मगर हालात ऐसे हैं कि कोई कुछ कर नहीं पा रहा है। वैसे भी प्रशासन मुख्यमंत्री के आगमन पर अगवानी के लिएमुख्यालय पर ही जमा हुआ है।

लखनापार बांध खजूरडांड के पास धंसा

खबर है कि जिला मुख्यालय से 9 किमी दूर खजूरडांड गांव के पास आज सुबह दस बजे लखनापार–बैदौला बांध पानी के दबाव से धंस गया। इसकी आशंका पिछले 48 घंटो से बनी हुई थी, लेकिन सिंचाई विभाग ने कोई उपाय नहीं किया। तटबंध धंसते ही खजूरडांड, तिघरा, महुरइया, चोरई, चोरवर, सियरापार, छितरापार चुरिहारी और आसपास के दो दर्जन गांवों पानी घुसने लगा। लोग गांव छोड़ कर भागने लगे। बताया जाता है कि खजूरडांड गांव के अधिकांश लोग घर से पलायन कर गये हैं। लिघरा, महुरइया आदि  से लोगों के पलायन की खबर है। ग्रामीणों का आरोप है कि तटबंध कमजोर था फिर भी इसकी मरम्मत नहीं की गई। बांध में रिसाव के बावजूद वहां पेट्रलिंग नही कराई गई।

काशǃ प्रशासन ने ध्यान दिया होता

जिले में तटबंधों के निरंतर टूटने के पीछे ग्रामीण प्रशासन की लापरवाही बता रहे हैं। तिधरा गांव के कैलाश दुबे बताते हैं कि इस साल तटबंध की मरम्मत नहीं हुई थी। पानी बढ़ते ही इसके टूटने की आशंका व्यक्त की जा रही थी। ग्रामीण रात रात भर जाग कर बंधे की मरम्मत कर रहे थे, लेकिन विभाग के लाग नदारद ही रहे। उनका कहना है कि अगी बरसात के पहले बांध के रैट होलों व रेनकटों को भर दिया गया होता तो आज यह संकट खड़ा नहीं होता। इसी प्रकार का आरोप सतवाढ़ी गांव के लोगों ने लगाया है। ग्रामवासी बशीर का कहना है कि इस साल तटबंधों की मरम्मत का काम नहीं किया गया। जबकि यह बांध पहले से ही कमजोर था।

विजय पासवान ने कहा कि सो रहा प्रशासन

इस सिलसिले में सदर के पूर्व विधायक विजय पासवान का कहना है कि  बाढ़ से पूर्व जो काम प्रशासन का करना था, वह नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि बाढ़ चौकियां काग्जों पर बना ली गईं। बांधों की मरम्मत कागजों में दिखा कर धन का बंदरबांट कर लिया गया। किसी भी तटबंध पर इस साल न रेनकट भरे गये न ही रैटहोंलों को बंद किया गया। इस बार संवेदनशील तटबंधों पर निगरानी की व्यवस्था भी नहीं है। शासन प्रशासन सो रहा है और जनता डूब रही है। उन्होंने जिलाधिकारी से राहत बचाव कार्य तेज करने की मांग की है।

गोरखपुर– गोंडा रेल लाइन बंद

एक अन्य सूचना के मुताबिक गो़रखपुर से गोंडा वाया सिद्धार्थनगर की रेल सेवा भी बंद कर दी गई है। खबर है कि  गोरखपुर जिले  के कौडिया स्टेशन व गोरखपुर में रेल लाइन पर पानी चढ़ गया है।इससे गोखपुर से  सिद्धार्थनगर होकर गोंडा, लखनऊ व मुम्बई जाने वाली गाड़ियां अनिश्चित काल के लिए बंद कर दी गई  है। रेल सूत्रों का कहना है कि पानी उतरने के बाद उसकर परीक्षण होगा तब ही रेल सेवा बहाल की जायेगी।

 

 

 

 

 

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