Breaking- रोड एक्सीडेंट में दो दारोगाओं की दर्दनाक मौत, दो घायल, पुलिस विभाग में मातम का माहौल

August 2, 2019 12:53 pm0 commentsViews: 1971
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—- चिल्हिया थाना इंचार्ज थे राजकुमार यादव, नित्यानंद भी थे पूर्व थाना इंचार्ज, जा रहे थे इलाहाबाद

 

निजाम अंसारी के साथ  अमित श्रीवास्तव

थानाध्यक्ष को अस्पतान ले जाते लोग

 

“यूपी के सिद्धाथनगर जिले में तैनात दो दारोगाओं की सुल्तानपुर जिले में एक रोड एक्सीडेंट में दर्दनाक मौत हो गई है। दो अन्य व्यक्ति गंभीर रुप से घायल हैं। उनका इलाज चल रहा है। मृतकों में एक राजकुमार यादव वर्तमान में सिद्धार्थनगर के चिल्हया थाने के थानाध्यक्ष थे और दूसरे वहीं पर एस आई थे। वह भी पूर्व में कई थानों के थानाध्यक्ष रहे थे । दोनों घायल भी यहीं के निवासी हैं। एक्सीडेंट आजशुक्रवार सुबह साढ़े सात बजे हुआ बताया जाता है।”

कहां और कैसे हुआ एक्सीडेंट

बताया जाता है चिल्हिया थानाध्यक्ष राजकुमार यादव अपने साथी दारोगा नित्यानंद यादव व क्षेत्र के नूर मोहम्मद पुत्र अब्बास ग्राम धनौरा व सलीम खान पुत्र शहाबुद्दीन शोहरतगढ़ (दोनों निवासी जिला सिद्धार्थनगर) के साथ आजल सुबह 5 बजे विभागीय काम से उच्च न्यायालय इलाहाबाद जा रहे थे। लगभग साढ़े सात बजे उनकी ब्रेजा कार यूपी 55 जेड 5621 सुल्तानपुर जिले के थाना कूरे भार के जमौली नामक  स्थान पर पहूंची ही थी कि सामने से आ रही एक ट्रक ने उनकी कार को जबरदस्त टक्कर मार दी।

दारोगा की क्षतिग्रस्त कार

बताते हैं कि टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि नित्यानंद यादव (37) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि राजकुमार यादव की सांसें वल रही़ थी। शेष दोनो साथी भी लगभग मरणासन्न थे।  तीनों जीवित लोगों को राहगीरों ने अस्रूपताल पहुंचाया, तत्काल वहां पुलिस भी पवहुंच गई, जहां थाना इंचार्ज राजकुमार यादव की भी मौत हो गई दो अन्य नूर मुहम्मद और सलीम का अभी इलाज चल रहा है। ट्रक के नम्बर का पता नहीं चल सका है। बहरहाल थाना कूरेभार पुलिस से  घटना की सूचना पाकर  यहां से पुलिस टीम उनकी लाश लेने रवाना हो गई है।  पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने घटना पर शोक जताया है।

दोनों दारोगाओं की दर्दनाक मौत से पुलिस विभाग में शोक छा गया है। दारोगा राजकुमार पडोसी जिले गोरखपुर के तथा नित्यानंद देवरिया जिले के निवासी थे। इस हादसे के बाद दोनों परिवारों में मातम छा गया है। दोनों की गृहस्थी अभी कच्ची थी, उनके बच्चे भी छोटे हैं। दोनों परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूटपड़ा है।

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