एक जनवरी से यूपी पीडब्ल्यूडी ठेकेदार संघ कार्य बहिष्कार करेगा

December 25, 2021 8:53 pm0 commentsViews: 332
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अजीत सिंह
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश पीडब्ल्यूडी विभाग के उच्चाधिकारियों के अड़ियल रवैये और टेंडर प्रक्रिया में प्रहरी एप्प द्वारा मनमानी तथा सड़क निर्माण में ठेकेदारों से 6 गुना रॉयल्टी चार्ज करने जैसे तमाम विसंगतियों को लेकर ठेकेदार संघ ने आगामी एक जनवरी से कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया है। विभाग व प्रदेश के किसी नेता द्वारा किसी भी स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं किया जा रहा है जिसके फलस्वरूप अपनी गाढ़ी कमाई को डूबते देख ठेकेदारों को यह निर्णय लेना पड़ा।
इस बावत ठेकेदार संघ के प्रदेश महामंत्री राजू वर्मा ने प्रमुख सचिव (विकास) एवं विभागाध्यक्ष लोक निर्माण विभाग उत्तर प्रदेश लखनऊ को 24 दिसंबर को एक शिकायती पत्र लिखा है। शिकायती पत्र का समर्थन करते हुए सिद्धार्थनगर जिले के अध्यक्ष सूर्य प्रकाश चतुर्वेदी ने पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों से कई सवाल किया है।
आइये जानते हैं क्या है विसंगतियां और 1 जनवरी 2022 से ठेकेदार निविदा और कार्य बंदी की ओर क्यों?
एक गुना रॉयल्टी दे कर के 6 गुना रॉयल्टी की कटौती।
प्रहरी ऐप की तमाम विसंगतियां जिसके कारण टेंडर मैनेज लखनऊ कमेटी द्वारा की जा रही है। बार-बार शिकायत दर्ज कराने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं। गलत एस्टीमेट पर कार्य कराना किसी भी साइड (कार्यस्थल) पर 14 चक्का गाड़ी या नहीं जा सकती उसके बाद भी बिना ढुलाई के ठेकेदार से कार्य कराना। शेड्यूल ‘सी’ के माध्यम से ठेकेदार को तारकोल निर्गत करना और जीएसटी के मद में 18 परसेंट की कटौती कर लेना नाजायज है।
प्रांतीय खंड सिद्धार्थनगर ठेकेदार संघ के उपाध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि इस समय विभाग में ठेकेदारों के विपरीत ऐसे तमाम विषय हैं जिस पर कोई सुनवाई नहीं हो रही जिसके कारण ठेकेदारों को कार्य और निविदा  से विरक्त रहने का निर्णय लेना पड़ा।
इस संबंध में पिछले 1 साल से लगातार मुख्य अभियंता गोरखपुर क्षेत्र लोक निर्माण विभाग, प्रमुख अभियंता, लोक निर्माण विभाग उत्तर प्रदेश, सचिव लोक निर्माण विभाग उत्तर प्रदेश, मंत्री लोक निर्माण विभाग उत्तर प्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार, आवास एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री भारत सरकार, सांसद गोरखपुर, कुशीनगर, विधायक कैंपियरगंज, पिपराइच, सहजनवा, नौतनवा महाराजगंज, फरेंदा महाराजगंज, महादेवा बस्ती, रुधौली, बस्ती, सभी लोगों से लगातार ठेकेदारों के हो रहे उपरोक्त उत्पीड़न से अवगत कराया गया।
किसी भी स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं हुई जिसके फलस्वरूप अपनी गाढ़ी कमाई को डूबते देख ठेकेदारों को यह निर्णय लेना पड़ा

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