डुमरियागंज में दिलचस्प मोड़ पर पहुंची वार्ड नम्बर 19 की चुनावी जंग

October 14, 2015 11:52 am0 commentsViews: 486
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नजीर मलिक

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डुमरियागंज के वार्ड नम्बर 19 की चुनावी जंग दिलचस्प मोड़ पर है। इस वार्ड में चार कदृदावर उम्मीवारों में एक-एक वोट के लिए जबरदस्त रस्साकशी चल रही है। हर कोई एक दूसरे को मात देने की जुगत में नये-नये नुस्खे इस्तेमाल कर रहा है।

तकरीबन 30 हजार वोटरों वाले इस इलाके की गुत्थियां बहुत उलज्ञी हुई हैं। समाजवादी पार्टी के नेता और सासंद आलोक तिवारी के करीबी अफसर रिजवी, मौजूदा विधायक कमाल यूसुफ मलिक के साहबजादे इरफान मलिक, स्व. विधायक मलिक तौफीक अहमद के भाई मलिक अयूब उर्फ चिन्ने और कांग्रेस नेता सच्चिदानंद पांडेय की पत्नी कांती पांडे और भाजपा के कसीम रिजवी व सांसद जगदम्बिका पाल के करीबी यहां से उम्मीदवार हैं।

इस इलाके में हल्लौर, कदिराबाद, और बिथरिया तीन बड़े गांव है, जिसमें वोटरों की तादाद तकरीबन दस हजार है। अफसर रिजवी और कसीम रिजवी यहीं के रहने वाले हैं। दोनों की लड़ाई हल्लौर के वोटों पर कब्जा कर बाकी इलाकों में बढ़त बनाने की है।

कादिराबाद के इरफान मलिक अपने गांव में अपनी बढ़त को लेकर बेफिक्र है। उन्हें बिथरिया के बड़े वोट बैंक में भी हिस्स्ेदारी का भरोसा है। लेकिन इस बार बिथरिया निवासी स्व. विधायक के भाई और बसपा नेता सैयदा मलिक के चाचा अयूब मलिक भी चुनाव लड़ रहे है। जाहिर है उन्हें बिथरिया में वाकओवर नहीं मिलने वाला है।फिर भी बिथरिया में बेशक वह अच्छे मत बटोर सकते हैं।

हल्लौर से सटे इलाकों खास कर भटंगवा, में अगर अफसर और कसीम लड़ रहे हैं तो बहेरिया, दाउदजोत, हजिरवा जैसे गांवों में कांति पांडेय की हवा है। इसी प्रकार बनगवा, अगया और सेमरी, सोनखर जैसे गांवों में इरफान मलिक दिख रहे हैं।

दरअसल इस इलाके में पार्टी के परपरागत वोटों का महत्व कभी नहीं रहा। आम तौर से इस क्षेत्र में वोट मलिक तौफीक और मलिक कमाल यूसुफ के खेमों में बंटते रहे हैं। बाकी बचे वोटों पर भाजपा का अधिकार होता रहा है। लेकिन तौफीक साहब की मौत के बाद उनका खेमा कुछ कमजोर पड़ा है।

इस लिहाज से देखा जाये तो यहां समाजवादी पार्टी की स्थिति कमजोर लगती है, लेकिन समाजवादी पार्टी के पास अफसर रिजवी जैसा उम्मीदवार है जो 80 के दशक से ही इलाके से जुड़ा रहा है। उनकी सक्रियता ही सपा के लिए सुकून देने वाली है।

फिलहाल चुनावी परिदृश्य अभी साफ नहीं है। अंतिम क्षणों में हार जीत इस बात पर तय करेगी कि इलाके के भाजपा समर्थित वोट पार्टी के मुस्लिम कंडीडेट कसीम रिजवी को मिलेंगे या पूर्व भाजपाई कांती पांडेय को।

कांती के पति सच्चिदानंद पांडेय वर्तमान में कांग्रेस में है। वह अपने पुराने सम्पर्कों के आधार पर भाजपाई वोटों में सेध लगाने में जुटे हैं। दूसरी तरफ कसीम रिजवी उन्हें रोकने की कोशिशि में है। ऐसे में जंग बहुत दिलचस्प है। दो तीन दिन बाद ही पता चलेगा कि चुनावी उंट किस करवट बैठने वाला है।

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